Peoples Update Special :डॉ. अंबेडकर और बाबू जगजीवन राम फाउंडेशन में नियुक्तियां अटकी, जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रही मदद

राजीव सोनी, भोपाल। फाउंडेशन के मनोनीत सदस्य जरूरतमंदों के लिए आर्थिक सहायता और विभिन्न योजनाओं की अनुशंसा कर सकते हैं। मनोनयन लंबित होने से इंटरकास्ट मैरिज प्रोत्साहन योजना और गंभीर बीमारी में मिलने वाली आर्थिक सहायता जैसी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। पूर्व में नियुक्त सदस्य इन योजनाओं के जरिए कई जरूरतमंदों को लाभ दिला चुके हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह प्रक्रिया रुकी हुई है।
मनोनयन नहीं होने से योजनाओं का लाभ प्रभावित
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन और बाबू जगजीवन राम राष्ट्रीय फाउंडेशन में मध्यप्रदेश से शासी और साधारण निकाय सदस्यों का मनोनयन नहीं हो पाया है। इस वजह से गरीब और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इन सदस्यों की अनुशंसा से मिलने वाली तीन लाख रुपये तक की सहायता नहीं मिल पा रही है। इसी तरह इंटरकास्ट मैरिज प्रोत्साहन योजना के तहत ढाई लाख रुपये की सहायता राशि मंजूर कराने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार के पास होने के बावजूद नियुक्तियां लंबित हैं। इससे अनुसूचित जाति वर्ग के जरूरतमंद योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
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थावरचंद गेहलोत के कार्यकाल में हुई थीं नियुक्तियां
अलग-अलग राज्यों के लिए नियुक्त किए जाने वाले मनोनीत प्रतिनिधि केंद्र और राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के बीच समन्वय बनाकर योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पांच साल पहले तक मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले थावरचंद गेहलोत के कार्यकाल में मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में इन सदस्यों की नियुक्ति हुई थी। बाद में यह प्रक्रिया रुक गई और अब तक नए मनोनयन नहीं हो सके हैं। इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी दिखाई दे रहा है।
सदस्यों की अनुशंसा पर मिलती है राहत राशि
फाउंडेशन के मनोनीत सदस्य प्रदेश के किसी भी जिले में संबंधित कलेक्टर को जरूरतमंद लोगों के लिए आर्थिक सहायता की अनुशंसा कर सकते हैं। अनुशंसा के आधार पर कलेक्टर राहत राशि जारी करते हैं। मध्यप्रदेश से पहले दोनों फाउंडेशन में सदस्य रह चुके प्रतिनिधियों ने कई जरूरतमंद मरीजों और इंटरकास्ट मैरिज के मामलों में सहायता राशि दिलाई थी। दो साल पहले तत्कालीन भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष ने चार नाम केंद्रीय मंत्री को भेजे थे, लेकिन अब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं हो सके हैं।
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फाउंडेशन की कई योजनाएं प्रभावित
डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन और बाबू जगजीवन राम राष्ट्रीय फाउंडेशन के माध्यम से नि:शुल्क कोचिंग योजना, छात्रवृत्ति सहायता, अंबेडकर भवन, विकास शिविर, प्रतिभा सम्मान, सामाजिक न्याय पुरस्कार, रोजगार एवं ऋण सहायता, दिव्यांगों को स्कूटी उपलब्ध कराना, अनुसूचित जाति अभ्युदय एवं श्रेष्ठा योजना जैसी कई योजनाएं संचालित की जाती हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास से जोड़ना है। मनोनयन लंबित रहने से इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी असर पड़ रहा है।
पूर्व प्रतिनिधियों ने जताई चिंता
पूर्व सदस्य भगवती शिंदे ने कहा कि यह अनुसूचित जाति वर्ग की मदद के लिए बेहद अच्छी योजना है और उन्होंने अपने कार्यकाल में बड़वानी सहित अन्य जिलों के कई मरीजों और इंटरकास्ट मैरिज के मामलों में योजना का लाभ दिलाया था। वहीं मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कैलाश जाटव ने बताया कि दो वर्ष पहले भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने दो महिला और दो पुरुष सदस्यों के नाम मनोनयन के लिए भेजे थे, लेकिन अब तक नियुक्ति आदेश जारी नहीं हो पाए। इसके कारण प्रदेश के जरूरतमंद लोगों को केंद्र सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।












