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टिकट नहीं मिला तो भड़क उठे समर्थक!दतिया में हाईवे जाम, पुलिस पर पथराव से मचा हड़कंप, NH-44 पर 15 KM लंबा जाम

बीजेपी की ओर से दतिया उपचुनाव के लिए नए उम्मीदवार की घोषणा के बाद जिले का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र हो गया, जिससे हाईवे पर लंबा जाम लगा और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई।
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दतिया में हाईवे जाम, पुलिस पर पथराव से मचा हड़कंप, NH-44 पर 15 KM लंबा जाम
दतिया में प्रदर्शन के दौरान हाईवे पर जुटी भारी भीड़

मध्य प्रदेश। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी उम्मीदवार घोषित होने के बाद जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह प्रदर्शन बड़े आंदोलन में बदल गया और राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबा जाम लग गया। हालात संभालने पहुंची पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद पत्थरबाजी हुई और कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है और मामले की जांच जारी है।

टिकट बदलते ही शुरू हुआ विरोध

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी की ओर से आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद विरोध शुरू हो गया। लंबे समय से दतिया की राजनीति में सक्रिय रहे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया। उनका कहना है कि पार्टी ने पुराने कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी की है। इसी नाराजगी के चलते बड़ी संख्या में समर्थक सड़कों पर उतर आए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

हाईवे पर घंटों लगा रहा जाम

विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों ने दतिया से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया। यह जाम कई घंटों तक जारी रहा और करीब 20 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। बसों, निजी वाहनों और मालवाहक ट्रकों के साथ आम लोग भी इस जाम में फंस गए। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन लगातार प्रदर्शन खत्म कराने की कोशिश करता रहा।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ा तनाव

प्रदर्शन के दौरान हालात तब और बिगड़ गए जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। प्रशासन का कहना है कि देर रात से सुबह तक कई दौर की बातचीत हुई लेकिन जब रास्ता नहीं खुला और कुछ जगहों पर पथराव हुआ, तब पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। सुबह करीब छह बजे तक पथराव की घटनाएं होती रहीं और पुलिस के कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। दूसरी ओर, प्रदर्शन में शामिल बीजेपी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ सख्ती की। उनका दावा है कि कई लोगों को चोटें आईं और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार हुआ। हालांकि इन आरोपों की प्रशासन की ओर से पुष्टि नहीं की गई है।

घायलों को लेकर दोनों पक्षों के अलग अलग दावे

प्रदर्शन के बाद घायलों की संख्या को लेकर भी अलग अलग दावे सामने आए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई में 50 से अधिक बीजेपी कार्यकर्ता घायल हुए हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि पथराव में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। जिला प्रशासन के अनुसार जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और आठ पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। प्रशासन ने लाठीचार्ज किए जाने की बात से इनकार किया है।

जिलाध्यक्ष ने सामूहिक इस्तीफे का किया ऐलान

इस पूरे विवाद के बीच बीजेपी दतिया जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा ने बड़ा कदम उठाया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर कहा कि टिकट वितरण का फैसला एकतरफा है और इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं का सम्मान आहत हुआ है। उन्होंने अपने साथ कई पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संगठन के जिम्मेदार लोगों के सामूहिक इस्तीफे की घोषणा कर दी। पत्र में यह भी कहा गया कि यदि 24 घंटे के भीतर पार्टी नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार नहीं बनाती है तो वे प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देने पर विचार करेंगे। इस फैसले के बाद जिले में बीजेपी के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

समर्थकों की मांग, नरोत्तम मिश्रा को ही मिले टिकट

नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का कहना है कि वे अपने नेता के साथ खड़े हैं और पार्टी नेतृत्व को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि जिस उम्मीदवार को स्थानीय कार्यकर्ता अच्छी तरह नहीं जानते, उसके लिए चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा। समर्थकों का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा का क्षेत्र में मजबूत जनाधार है और उन्हें टिकट नहीं देना कार्यकर्ताओं की उपेक्षा है।

बीजेपी के सामने बढ़ी नई चुनौती

एक तरफ उसे कांग्रेस के खिलाफ चुनावी मुकाबले की तैयारी करनी है, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को भी संभालना होगा। अगर संगठन के भीतर मतभेद जल्द खत्म नहीं हुए तो इसका असर चुनाव प्रचार और मतदान पर भी पड़ सकता है। अब सभी की नजर पार्टी नेतृत्व के अगले फैसले पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बीजेपी अपने घोषित उम्मीदवार के साथ आगे बढ़ती है या फिर कार्यकर्ताओं की नाराजगी को देखते हुए कोई नया राजनीतिक फैसला लेती है। फिलहाल दतिया में विरोध प्रदर्शन भले ही समाप्त हो गया हो लेकिन इस विवाद ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को हराया

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को हराया था। बाद में वर्ष 2026 में एक पुराने धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई। सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई, जिससे दतिया सीट खाली हो गई। इसी कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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