तिब्बत में भूकंप का कहर! 16 की मौत, सैकड़ों घर ढहे, चीन-म्यांमार से पाकिस्तान तक कांपी धरती

बीजिंग। तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया। 7.0 तीव्रता के इस झटके से कई इलाकों में मकान ढह गए और बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, हादसे में कम से कम 16 लोगों की जान गई है। घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। सबसे ज्यादा नुकसान नागचू और उसके आसपास के क्षेत्रों में बताया गया है। प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए बड़ी संख्या में कर्मियों को तैनात किया है। इस बीच, आसपास के देशों में भी भूकंप के झटके दर्ज किए गए।
नागचू में सबसे ज्यादा नुकसान, सैकड़ों मकान गिरे
तिब्बत के नागचू शहर और आसपास के इलाकों में भूकंप का असर सबसे ज्यादा देखने को मिला। यहां 339 मकान और पशुओं को रखने के 20 बाड़े गिर गए। कई परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। भूकंप के बाद लोग सुरक्षित जगहों की ओर भागते नजर आए। मलबे और क्षतिग्रस्त इमारतों के कारण राहत कार्य में भी चुनौतियां सामने आई हैं।
1,600 से ज्यादा बचावकर्मी राहत कार्य में जुटे
भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है। 1,600 से अधिक बचावकर्मियों को अलग-अलग इलाकों में तैनात किया गया है। जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। अधिकारियों ने प्रभावित लोगों के लिए करीब 3,000 टेंट और 1,000 तैयार आवासीय इकाइयों की व्यवस्था की है। इसके अलावा फोल्डिंग बेड, टॉर्च और सर्दी से बचने के लिए कपड़े भी भेजे गए हैं।
चीन में 5.2 और म्यांमार में 3.5 तीव्रता के झटके
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के आंकड़ों के अनुसार, 22 और 23 अक्टूबर के दौरान तिब्बत, चीन और म्यांमार में कई भूकंपीय घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें तिब्बत में सबसे तेज 7.0 तीव्रता का भूकंप आया, जबकि चीन में 5.2 तीव्रता का झटका दर्ज हुआ। म्यांमार में 3.5 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया। मुख्य भूकंप के बाद तिब्बत और चीन के कुछ इलाकों में भी कई झटके महसूस किए गए।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी भूकंप
भूकंपीय गतिविधियां केवल तिब्बत और उसके आसपास के क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहीं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में 4.9 तीव्रता और अफगानिस्तान में 4.1 तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए। हालांकि, इन घटनाओं को तिब्बत में आए भूकंप का सीधा परिणाम नहीं माना जा सकता। किसी भी क्षेत्र में भूकंप से होने वाले नुकसान का आकलन उसकी तीव्रता, गहराई, केंद्र से दूरी और स्थानीय जमीन की स्थिति के आधार पर किया जाता है।
चट्टानें गिरने से सड़क बंद
भूकंप के कारण पहाड़ी इलाकों में चट्टानें गिरने और भूस्खलन की घटनाएं भी सामने आई हैं। इसके चलते नेशनल हाईवे-317 के एक हिस्से पर आवाजाही रोक दी गई है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य से जुड़े वाहनों को ही वहां जाने की अनुमति दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्र में अगले तीन दिनों तक रुक-रुककर बर्फबारी होने की आशंका है। खराब मौसम के कारण बचाव अभियान और प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने में परेशानी हो सकती है।
आखिर क्यों आते हैं भूकंप के तेज झटके?
पृथ्वी की ऊपरी परत कई टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें लगातार धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। जब इनके बीच दबाव बढ़ता है और चट्टानों में जमा ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो धरती में कंपन पैदा होता है। भूकंप का असर उसकी गहराई और आसपास की जमीन की बनावट पर भी निर्भर करता है। तिब्बत में आए इस भूकंप के बाद प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने और लोगों को सुरक्षित रखने में जुटा है।




















