बालाघाट: डेढ़ साल के बच्चे की मौत, कई बच्चों का अस्पताल में इलाज जारी

बालाघाट। परिजनों के अनुसार, बच्चे के शरीर पर दाने उभरने के बाद उसे खैरागढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घर लौटने के बाद उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ी और मौत हो गई, हालांकि मौत की वास्तविक वजह अभी सामने नहीं आई है। इस बीच, आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की मौत के आंकड़ों को लेकर प्रशासन और कांग्रेस के दावों में अंतर सामने आया है।
मौत की वजह जानने के लिए रिपोर्ट का इंतजार
बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच कराने की बात कही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघन दाहिया के अनुसार, खैरागढ़ अस्पताल की रिपोर्ट मिलने के बाद मौत के कारणों को स्पष्ट करने में मदद मिलेगी और उसके आधार पर आगे की स्थिति सामने आ सकेगी।
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मातला के तीन बच्चों का लांजी अस्पताल में इलाज जारी
गांव में तीन अन्य बच्चों की तबीयत खराब होने पर उन्हें लांजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें एक वर्षीय जीवन धुर्वे, तीन वर्षीय किशन धुर्वे और छह वर्षीय लासु धुर्वे शामिल हैं। जीवन के पिता का नाम बीरबल, जबकि किशन और लासु के पिता का नाम सोमेलाल है।
जिला अस्पताल में भी नौ बच्चों का उपचार जारी
बालाघाट जिला अस्पताल में भी बच्चों का उपचार जारी है। लांजी बीएमओ डॉ. अक्षय उपराड़े ने बताया कि अब तक 300 बच्चों को भर्ती कराया जा चुका है, जिनमें से छह बच्चों का इलाज अभी चल रहा है। बच्चों की बिगड़ती सेहत के बीच स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और उपचार व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बच्चों की मौत के आंकड़ों पर अलग-अलग दावे
आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की मौतों को लेकर प्रशासन और कांग्रेस के आंकड़ों में अंतर सामने आया है। प्रशासन 32 बच्चों की मौत की जानकारी दे रहा है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि मृतक बच्चों की संख्या 45 से अधिक है। ऐसे में मौतों के वास्तविक आंकड़ों और उनके कारणों की स्पष्टता महत्वपूर्ण हो गई है।




















