सिंहस्थ में हर दिन 360 मेगावाट बिजली की जरूरत, पिछले मेले से 63 प्रतिशत ज्यादा खपत का अनुमान

अशोक गौतम, भोपाल। उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ में बिजली की मांग पिछले आयोजन के मुकाबले काफी बढ़ने का अनुमान है। बिजली कंपनी के आकलन के मुताबिक सिंहस्थ के दौरान प्रतिदिन करीब 360 मेगावाट बिजली की खपत हो सकती है। पिछले सिंहस्थ में यह मांग लगभग 220 मेगावाट प्रतिदिन थी। इस तरह आगामी सिंहस्थ में बिजली की मांग में करीब 38 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया गया है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, मेला क्षेत्र के विस्तार और विभिन्न व्यवस्थाओं को देखते हुए बिजली आपूर्ति का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की कवायद शुरू की गई है।
300 करोड़ से बनेगा एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सबस्टेशन
सिंहस्थ के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सबस्टेशन सहित जरूरी विद्युत अधोसंरचना विकसित कर रही है। इसके साथ ही बिजली की लाइनों, ट्रांसफार्मरों और अन्य उपकरणों की क्षमता बढ़ाने तथा व्यवस्था को दुरुस्त करने के काम किए जा रहे हैं। इन कार्यों का उद्देश्य मेले के दौरान बढ़ने वाले बिजली लोड को संभालना और आपूर्ति में व्यवधान की आशंका कम करना है।
ये भी पढ़ें: सिंहस्थ के 20 हजार करोड़ के कामों की डेडलाइन तय, नवंबर में सभी पेंडिंग मंजूरियां लेना जरूरी
दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
बिजली व्यवस्था से जुड़े कार्य दिसंबर 2027 तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन कार्यों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। शेष काम समयसीमा में पूरा करने पर जोर है, ताकि सिंहस्थ शुरू होने से पहले बिजली आपूर्ति की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा सके।
भीड़ और व्यवस्थाओं के लिए जरूरी होगी निर्बाध आपूर्ति
सिंहस्थ के दौरान घाटों, मंदिरों, मेला क्षेत्र, अस्थायी शिविरों, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और अन्य जरूरी सेवाओं के संचालन में बिजली की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। ऐसे में केवल बिजली उत्पादन और उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उसे निर्बाध रूप से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने वाला नेटवर्क भी अहम होगा। मांग में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए सबस्टेशन, ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों को मजबूत करना जरूरी है। तैयारियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी परियोजनाएं तय समय पर पूरी हों और आयोजन के दौरान बढ़े हुए लोड के अनुरूप बिजली आपूर्ति बनी रहे।
ये भी पढ़ें: जिस घर में बीता बचपन, वहीं CM मोहन यादव ने खुद चलाई गैंती ; पेश की मिसाल




















