‘आज भले बाहरी हूं, लेकिन इस हाईकोर्ट का हिस्सा बनना चाहता हूं’, पदभार ग्रहण करने के बाद बोले नए चीफ जस्टिस कोगजे

जबलपुर। हर बार की अपनी परंपरा होती है। मैं गुजरात हाईकोर्ट से इस समृद्धशाली परंपरा को सीखने आया हूं। मप्र हाईकोर्ट ने जस्टिस एम हिदायतउल्लाह, जस्टिस जीपी सिंह, जस्टिस जेएस वर्मा और जस्टिस आरसी लाहोटी जैसे जज दिए हैं। भले ही आज मैं बाहरी हूं, लेकिन मैं इस हाईकोर्ट हिस्सा बनना चाहता हूं। यह बात मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने पदभार ग्रहण करने के बाद ओवेशन (स्वागत) समारोह को संबोधित करते हुए कही।
किसके लिए सीजे ने क्या कहा
बार के लिए : अच्छे कोर्ट के लिए सबसे ज्यादा जरूरत होती है अच्छे बार की। जज के पास काफी ज्ञान, अनुभव होता है लेकिन एक वकील उन्हें अनजाने पहलुओं से अवगत कराते हैं। बार और बेंच दोनों ही पक्षकारों के लिए काम करते हैं।
पक्षकार के लिए : न्यायपालिका के पूरे सिस्टम का केन्द्र बिन्दु पक्षकार होते हैं। उनकी कभी भी अनदेखी नहीं की जा सकती है। कोर्ट में मुकदमों की संख्या सैकड़ों, हजारों में होती है, लेकिन हर मुकदमें के पीछे एक कहानी होती है।
जूनियर्स के लिए : सफलता एक दिन में नहीं मिलती है। इसके लिए कड़ी मेहनत करना पड़ती है। मुकदमें में भले विपरीत आदेश हो जाए, लेकिन जूनियर्स को हताश नहीं होना चाहिए। और न ही उन्हें किसी तरह का कोई समझौता करना चाहिए।
ये भी पढ़ें: सहारनपुर मस्जिद मामले में इलाहाबाद HC का बड़ा आदेश, 3 हफ्ते में मांगा जवाब
पहले दिन सुने 25 मुकदमे
ओवेशन समारोह के बाद नए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को कुल 25 मुकदमों पर सुनवाई की। बेंच ने जस्टिस विवेक रूसिया भी शामिल थे। बेंच ने पहला मुकदमा नागपुर के दिनेश पालीवाल का सुना, जिसने जमीन के दावे को लेकर सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी थी। मामला जमीन के कब्जे से संबंधित था। डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यह मामला कब्जे से जुड़ा हुआ है, जिसका निराकरण सिविल सूट के माध्यम से ही किया जा सकता है। रिट अपील पर दावे का निराकरण नहीं किया जा सकता।
ये भी पढ़ें: जस्टिस कोगजे की नई पारी शुरू, बने MP हाईकोर्ट के 30वें मुख्य न्यायाधीश … CM ने दी शुभकामनाएं




















