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‘आज भले बाहरी हूं, लेकिन इस हाईकोर्ट का हिस्सा बनना चाहता हूं’, पदभार ग्रहण करने के बाद बोले नए चीफ जस्टिस कोगजे

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने पदभार ग्रहण करने के बाद कहा कि वे गुजरात हाईकोर्ट की समृद्ध परंपराओं से सीखने आए हैं और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का हिस्सा बनना चाहते हैं। ओवेशन समारोह के बाद उन्होंने जस्टिस विवेक रूसिया के साथ डिवीजन बेंच में पहले दिन 25 मुकदमों की सुनवाई की।
‘आज भले बाहरी हूं, लेकिन इस हाईकोर्ट का हिस्सा बनना चाहता हूं’, पदभार ग्रहण करने के बाद बोले नए चीफ जस्टिस कोगजे
जबलपुर। चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे।

जबलपुर। हर बार की अपनी परंपरा होती है। मैं गुजरात हाईकोर्ट से इस समृद्धशाली परंपरा को सीखने आया हूं। मप्र हाईकोर्ट ने जस्टिस एम हिदायतउल्लाह, जस्टिस जीपी सिंह, जस्टिस जेएस वर्मा और जस्टिस आरसी लाहोटी जैसे जज दिए हैं। भले ही आज मैं बाहरी हूं, लेकिन मैं इस हाईकोर्ट हिस्सा बनना चाहता हूं। यह बात मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने पदभार ग्रहण करने के बाद ओवेशन (स्वागत) समारोह को संबोधित करते हुए कही। समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस विवेक रूसिया ने स्वागत भाषण देते हुए नए चीफ जस्टिस का परिचय दिया। समारोह को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन, महाधिवक्ता प्रशान्त सिंह, स्टेट बार काउंसिल की स्पेशल कमेटी के वाइस चेयरमैन दीपेन्द्र सिंह कुशवाहा, मप्र हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष मृगेन्द्र सिंह, हाईकोर्ट बार इन्दौर के अध्यक्ष मनीष यादव, हाईकोर्ट बार ग्वालियर के अध्यक्ष पवन पाठक, हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार के अध्यक्ष संजय अग्रवाल और सीनियर एडवोकेट्स काउंसिल के चेयरमैन उमाकांत शर्मा ने संबोधित करके नए चीफ जस्टिस के उज्जवल भविष्य की कामना की।

किसके लिए सीजे ने क्या कहा

बार के लिए : अच्छे कोर्ट के लिए सबसे ज्यादा जरूरत होती है अच्छे बार की। जज के पास काफी ज्ञान, अनुभव होता है लेकिन एक वकील उन्हें अनजाने पहलुओं से अवगत कराते हैं। बार और बेंच दोनों ही पक्षकारों के लिए काम करते हैं।

पक्षकार के लिए : न्यायपालिका के पूरे सिस्टम का केन्द्र बिन्दु पक्षकार होते हैं। उनकी कभी भी अनदेखी नहीं की जा सकती है। कोर्ट में मुकदमों की संख्या सैकड़ों, हजारों में होती है, लेकिन हर मुकदमें के पीछे एक कहानी होती है।

जूनियर्स के लिए : सफलता एक दिन में नहीं मिलती है। इसके लिए कड़ी मेहनत करना पड़ती है। मुकदमें में भले विपरीत आदेश हो जाए, लेकिन जूनियर्स को हताश नहीं होना चाहिए। और न ही उन्हें किसी तरह का कोई समझौता करना चाहिए।

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पहले दिन सुने 25 मुकदमे

ओवेशन समारोह के बाद नए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को कुल 25 मुकदमों पर सुनवाई की। बेंच ने जस्टिस विवेक रूसिया भी शामिल थे। बेंच ने पहला मुकदमा नागपुर के दिनेश पालीवाल का सुना, जिसने जमीन के दावे को लेकर सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी थी। मामला जमीन के कब्जे से संबंधित था। डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यह मामला कब्जे से जुड़ा हुआ है, जिसका निराकरण सिविल सूट के माध्यम से ही किया जा सकता है। रिट अपील पर दावे का निराकरण नहीं किया जा सकता।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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