Peoples Update Special :'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' अभियान पर सवाल, तीन जिलों ने बनाया विश्व रिकॉर्ड; लेकिन नशे के हॉटस्पॉट तक नहीं पहुंची मुहिम

विजय एस. गौर, भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार का 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' अभियान रिकॉर्ड बनाने में तो सफल रहा, लेकिन नशे से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों तक इसकी पहुंच नहीं बन सकी। एक ओर बालाघाट, बड़वानी और बुरहानपुर ने लाखों लोगों और विद्यार्थियों की भागीदारी से विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा किया, वहीं दूसरी ओर राजधानी भोपाल समेत इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के कई संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि वहां न तो कोई जागरूकता कार्यक्रम हुआ और न ही नशे के खिलाफ कोई प्रभावी संवाद। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अभियान केवल स्कूल-कॉलेजों तक सीमित रहेगा और नशे के वास्तविक हॉटस्पॉट तक नहीं पहुंचेगा, तो इसके अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आएंगे।
15 से 30 जुलाई तक चला अभियान
प्रदेशभर में 15 जुलाई से 30 जुलाई तक 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' अभियान चलाया गया। इस दौरान रैली, संगोष्ठी, स्लोगन प्रतियोगिता, चित्रकला प्रतियोगिता और सामूहिक शपथ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरकार के अनुसार इस अभियान के तहत छात्रों और आम लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।
तीन जिलों ने किया विश्व रिकॉर्ड का दावा
अभियान के दौरान तीन जिलों ने अलग-अलग गतिविधियों के जरिए विश्व रिकॉर्ड बनाने का दावा किया।
- बालाघाट: 1.25 लाख विद्यार्थियों और करीब 5 लाख लोगों ने ऑनलाइन नशा विरोधी शपथ ली।
- बड़वानी: 16 हजार से अधिक चित्रों और स्लोगनों के माध्यम से विद्यार्थियों ने नशा विरोधी संदेश दिया।
- बुरहानपुर: 32 हजार विद्यार्थियों ने सामूहिक संकल्प लेकर विश्व रिकॉर्ड की दावेदारी की।
जहां सबसे ज्यादा नशा, वहां अभियान नहीं
हालांकि अभियान की सबसे बड़ी कमजोरी यह रही कि जिन इलाकों में नशे की समस्या सबसे गंभीर है, वहां इसकी मौजूदगी लगभग नहीं दिखी। राजधानी भोपाल की झुग्गी-बस्तियों समेत कई शहरों के उन क्षेत्रों में, जहां शराब, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री की शिकायतें लगातार आती रहती हैं, स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें न तो जागरूक किया गया और न ही कोई विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। इन इलाकों में आए दिन नशे के कारण मारपीट, विवाद और सामाजिक समस्याओं की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
इन शहरों के संवेदनशील इलाके अब भी चुनौती
भोपाल
- गांधीनगर
- भानपुर
- रेलवे स्टेशन क्षेत्र
- गोविंदपुरा
इंदौर
- आजाद नगर
- विजयनगर
- खजराना
- लसूड़िया
ग्वालियर
- गोले का मंदिर से महाराजपुरा क्षेत्र
जबलपुर
- बेलबाग
- ओमती
- घमापुर
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स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
राजेश वर्मा, गोविंदपुरा (भोपाल) का कहना है कि गोविंदपुरा और बरखेड़ा जैसे स्लम क्षेत्रों में शराब, गांजा और अन्य नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं। यहां आए दिन नशेड़ियों के बीच विवाद और मारपीट होती है। ऐसे इलाकों में जागरूकता अभियान की सबसे अधिक जरूरत है। वहीं जाहिद खान, भानपुर (भोपाल) ने बताया कि भानपुर, रेलवे ब्रिज और मंडी क्षेत्र में खुलेआम गांजा बिकता है। सड़क किनारे लोग चिलम पीते नजर आते हैं, लेकिन इन झुग्गी क्षेत्रों में नशे के खिलाफ समझाने या जागरूक करने कोई नहीं आता।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रिकॉर्ड बनाने या विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित करने से नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। अभियान को उन बस्तियों, संवेदनशील इलाकों और युवाओं तक पहुंचाना होगा, जहां नशे का कारोबार और उसकी लत सबसे अधिक है।
अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई
एडीजी (नारकोटिक्स) पुलिस मुख्यालय भोपाल, डी. श्रीनिवास वर्मा ने कहा कि नशा विरोधी अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा जहां नशे का प्रभाव अधिक है, वहां जागरूकता कार्यक्रमों के साथ अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जागरूकता अभियान को स्कूलों से निकालकर झुग्गी-बस्तियों, नशे के हॉटस्पॉट और संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए, तभी इस तरह की मुहिम का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सकेगा।












