Peoples Update Special :ग्वालियर के युवा अधिवक्ता उदय शिवहरे ने शादी में ठुकराया दहेज, बोले-रिश्ते विश्वास और सम्मान से बनते हैं; लेनदेन से नहीं

सागर यादव, ग्वालियर। 22 जुलाई को आयोजित विवाह समारोह में उदय शिवहरे ने सार्वजनिक रूप से किसी भी प्रकार का दहेज लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि विवाह विश्वास, प्रेम और सम्मान का बंधन है, इसे लेन-देन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके इस फैसले की परिजनों और मेहमानों ने खुलकर सराहना की। सामाजिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि दहेज प्रथा खत्म करने के लिए सोच में बदलाव सबसे जरूरी है।
शादी के मंच से दिया दहेज लेने से किया मना
22 जुलाई को संपन्न हुए विवाह समारोह में जब दोनों परिवार शादी की रस्मों में व्यस्त थे, उसी दौरान उदय शिवहरे ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की कि वे किसी भी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि विवाह दो परिवारों और दो व्यक्तियों के विश्वास, प्रेम और सम्मान का बंधन है। इसे किसी भी स्थिति में लेन-देन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके इस फैसले ने समारोह में मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं उपस्थित लोगों ने इसे समाज के लिए सकारात्मक पहल बताया।
'बेटी सम्मान है, बोझ नहीं'
उदय शिवहरे ने कहा कि समाज में आज भी कई स्थानों पर बेटियों को बोझ समझा जाता है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि बेटियां परिवार की सबसे बड़ी पूंजी होती हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। विवाह किसी आर्थिक सौदे का नाम नहीं है, बल्कि संस्कार, विश्वास और रिश्तों का मिलन है। उन्होंने कहा कि लड़की अपने संस्कार, शिक्षा और व्यक्तित्व से नए परिवार को संवारती है। उसका मूल्य धन-दौलत या किसी वस्तु से नहीं आंका जा सकता।
परिजनों और युवाओं ने फैसले का किया स्वागत
विवाह समारोह में मौजूद परिजनों, रिश्तेदारों और मेहमानों ने उदय शिवहरे के इस निर्णय की खुले दिल से सराहना की। कई लोगों ने इसे नई पीढ़ी की सकारात्मक सोच और समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया। समारोह में मौजूद युवाओं ने भी दहेज प्रथा का विरोध करने और अपने जीवन में दहेज न लेने का संकल्प लेने की बात कही। लोगों का कहना था कि अगर शिक्षित युवा इसी तरह सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आगे आएंगे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर माहौल तैयार होगा। इस पहल ने समाज को सकारात्मक संदेश देने का काम किया।
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सोच बदलेगी तो खत्म होगी दहेज प्रथा
देश में दहेज निषेध कानून लागू है और दहेज लेना-देना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद कई स्थानों पर यह कुप्रथा अलग-अलग रूपों में आज भी देखने को मिलती है। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून के भरोसे इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। जब तक समाज और विशेष रूप से युवाओं की मानसिकता में बदलाव नहीं आएगा, तब तक दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी। उदय शिवहरे का यह निर्णय इसी बदलाव की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल माना जा रहा है।












