Peoples Update Special :मध्य प्रदेश में मदर मिल्क बैंक की बड़ी सफलता, 7 साल में 916 लीटर दूध दान; 6,100 नवजातों को मिला नया जीवन

मध्य प्रदेश में 7 साल में 3,930 माताओं ने 916.48 लीटर दूध दान किया। मदर मिल्क बैंक से 6,100 नवजातों को पोषण मिला और अस्पतालों में सफल डिस्चार्ज दर 5% तक बढ़ी। प्रदेश में जल्द 8 नए मदर मिल्क बैंक शुरू होंगे।
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मध्य प्रदेश में मदर मिल्क बैंक की बड़ी सफलता, 7 साल में 916 लीटर दूध दान; 6,100 नवजातों को मिला नया जीवन
मध्य प्रदेश में मदर मिल्क बैंक की बड़ी सफलता

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। एक मां का दूध नवजात के लिए जीवन का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पोषण होता है। लेकिन जब किसी कारणवश मां अपने शिशु को स्तनपान नहीं करा पाती, तब दूसरी मां का दान किया गया दूध उस बच्चे के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बन जाता है। मध्य प्रदेश में पिछले सात वर्षों के दौरान 3,930 माताओं ने 916.48 लीटर से अधिक दूध दान किया जिससे 6,100 से ज्यादा गंभीर और जरूरतमंद नवजातों को पोषण मिल सका। इस पहल का असर केवल बच्चों के पोषण तक सीमित नहीं रहा बल्कि जिन अस्पतालों में मदर मिल्क बैंक की सुविधा उपलब्ध है, वहां नवजातों की रिकवरी और सफल डिस्चार्ज दर में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

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सफलता के बाद प्रदेश में खुलेंगे 8 नए मदर मिल्क बैंक

प्रदेश में वर्तमान में भोपाल, इंदौर और काटजू अस्पताल में संचालित तीन मदर मिल्क बैंकों की सफलता को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने इस वर्ष 8 नए मदर मिल्क बैंक शुरू करने का निर्णय लिया है। नए मदर मिल्क बैंक निम्न स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे-

  • हमीदिया अस्पताल, भोपाल
  • मुरैना
  • विदिशा
  • खरगोन
  • खंडवा
  • बड़वानी
  • जबलपुर
  • रीवा

इसके बाद चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के अन्य जिलों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।

डिस्चार्ज रेट में 5 फीसदी का सुधार

वित्तीय वर्ष 2025-26 में मदर मिल्क बैंक का सकारात्मक असर अस्पतालों के उपचार परिणामों में भी देखने को मिला।

  • इंदौर मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में सफल डिस्चार्ज दर 83% से बढ़कर 87% हुई।
  • काटजू अस्पताल, भोपाल में यह दर 89% से बढ़कर 94% पहुंच गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित डोनर ह्यूमन मिल्क और स्तनपान सहायता ने कमजोर एवं समय से पहले जन्मे बच्चों की रिकवरी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ब्लड डोनेशन की तरह लगेंगे मिल्क डोनेशन कैंप

अभी तक अधिकतर दूध दान अस्पताल में भर्ती माताएं ही करती हैं। आम लोगों में इस विषय को लेकर जागरूकता कम है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अब ब्लड डोनेशन कैंप की तर्ज पर मदर मिल्क डोनेशन कैंप आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए प्रदेश के अस्पतालों को दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक माताएं इस अभियान से जुड़ सकें।

मदर मिल्क बैंक में कैसे सुरक्षित रखा जाता है दूध?

दान किए गए दूध को पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया से सुरक्षित बनाया जाता है।

  • दूध को 62.5 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 30 मिनट तक गर्म किया जाता है।
  • इसके बाद 10 मिनट में तापमान 25 डिग्री तक लाया जाता है।
  • फिर तेजी से 4 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है।
  • लैब जांच में सुरक्षित पाए जाने पर इसे -20 डिग्री सेल्सियस पर संग्रहित किया जाता है।
  • इस तापमान पर दूध 6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

दो प्रकार की होती हैं यह सुविधाएं

1. कॉम्प्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर (CLMC)

  • माताओं से दूध एकत्र करता है।
  • उसकी जांच एवं पाश्चुरीकरण करता है।
  • सुरक्षित भंडारण कर जरूरतमंद नवजातों तक पहुंचाता है।

2. लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (LMU)

  • यहां दूध संग्रहित नहीं किया जाता।
  • मां को दूध निकालने और उसे अपने ही बच्चे तक सुरक्षित पहुंचाने में सहायता दी जाती है।

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सक्सेस स्टोरी-1: मां से दूर था बच्चा, डोनर मिल्क बना सहारा

इंदौर की 26 वर्षीय यास्मीन ने 3.1 किलोग्राम के बेटे को जन्म दिया लेकिन सांस लेने में दिक्कत के कारण बच्चे को एनआईसीयू में भर्ती करना पड़ा। मां और बच्चे के अलग रहने के कारण स्तनपान संभव नहीं था। अस्पताल में उन्हें दूध निकालने की तकनीक सिखाई गई। मां के निकाले गए दूध और आवश्यक सहयोग से बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हुआ और बाद में उसे सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।

सक्सेस स्टोरी-2: 810 ग्राम के नवजात को मिला नया जीवन

भोपाल की 23 वर्षीय शिनम खान ने केवल 810 ग्राम वजन वाले बच्चे को जन्म दिया। एसएनसीयू में भर्ती होने के बाद बच्चे का वजन घटकर 610 ग्राम रह गया। मां का दूध पर्याप्त नहीं बन पा रहा था। ऐसे में उसे सुरक्षित पाश्चुरीकृत डोनर ह्यूमन मिल्क उपलब्ध कराया गया। नियमित स्तनपान सहायता और डोनर मिल्क की मदद से बच्चे का वजन लगातार बढ़ा और फरवरी 2026 तक वह 1,155 ग्राम का हो गया।

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फैक्ट फाइल

  • मदर मिल्क बैंक - 3
  • मांओं ने किया मिल्क डोनेट - 3930
  • मदर मिल्क डोनेशन - 916.48 लीटर
  • बच्चों को एक्सप्रेस्ड मदर्स मिल्क - 2467
  • बच्चों को पाश्चराइज्ड मदर मिल्क - 3841

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

पूर्व एनएचएम डायरेक्टर एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज शुक्ला के अनुसार, समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों के लिए मां का दूध सबसे महत्वपूर्ण पोषण है। जब मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता, तब सुरक्षित डोनर ह्यूमन मिल्क संक्रमण और आंतों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कम करने के साथ बच्चों की रिकवरी में मदद करता है।

एनएचएम की एमडी डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि मदर मिल्क बैंक वाले अस्पतालों में नवजातों की रिकवरी और सफल डिस्चार्ज दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। सुरक्षित डोनर मिल्क और स्तनपान सहायता इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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