MP High Court:'दिव्यांगता प्रतिशत कम होने पर सेवा समाप्त करना गलत', शिक्षक को नौकरी में दोबारा बहाल करने के दिए निर्देश

जबलपुर। अदालत ने दमोह के जिला शिक्षा अधिकारी को याचिकाकर्ता के मेरिट अंकों की फिर से समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि अगर याचिकाकर्ता ओबीसी वर्ग में चयन की पात्रता रखता है, तो उसे सेवा में बनाए रखा जाए।
बर्खास्त शिक्षक की याचिका पर सुनवाई
हाईकोर्ट ने यह फैसला दमोह के बर्खास्त प्राथमिक शिक्षक राहुल पटेल की याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता को 30 मार्च 2023 को ओबीसी/दिव्यांग श्रेणी के तहत प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। उनकी पदस्थापना भटपुरा (असलाना) के स्कूल में की गई थी।
ये भी पढ़ें: श्योपुर : कूनो में राष्ट्रपति मुर्मू की चीता मित्रों से मुलाकात, चीता संरक्षण सहित कई विषयों पर चर्चा की
मेडिकल जांच के बाद हुई थी सेवा समाप्त
मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई जांच में याचिकाकर्ता की स्थायी विकलांगता निर्धारित 40 प्रतिशत से कम पाई गई थी। इसके बाद 24 जून 2024 को जिला शिक्षा अधिकारी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता की रैंक 7243 थी
याचिकाकर्ता के वकील हितेन्द्र कुमार गोल्हानी ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल की कंसोलिडेटेड रैंक 7243 थी। मेरिट के आधार पर उनका चयन बिना किसी विकलांगता कोटे के भी सामान्य या ओबीसी ओपन श्रेणी में हो सकता था। इस आधार पर सेवा समाप्ति को गलत बताया गया।
हाईकोर्ट ने प्रमाण पत्र को माना वैध
सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता का विकलांगता प्रमाण पत्र फर्जी नहीं था। कोर्ट ने कहा कि समय के साथ उसकी शारीरिक स्थिति में सुधार हुआ था। इसलिए केवल विकलांगता प्रतिशत कम होने को सेवा समाप्ति का आधार नहीं बनाया जा सकता।
डीईओ के आदेश पर जताई आपत्ति
हाईकोर्ट ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी ने जल्दबाजी में आदेश जारी किया और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया। अदालत के अनुसार अभ्यर्थी की मेरिट रैंक पर विचार ही नहीं किया गया। इसी कारण मामले में पुनः समीक्षा कर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।












