Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

MP High Court:'दिव्यांगता प्रतिशत कम होने पर सेवा समाप्त करना गलत', शिक्षक को नौकरी में दोबारा बहाल करने के दिए निर्देश

एमपी हाईकोर्ट ने दमोह के एक प्राथमिक शिक्षक की सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार के अंक सामान्य या ओबीसी श्रेणी की कट-ऑफ के दायरे में आते हैं, तो केवल शारीरिक विकलांगता प्रतिशत कम होने के आधार पर उसे नौकरी से नहीं निकाला जा सकता।
'दिव्यांगता प्रतिशत कम होने पर सेवा समाप्त करना गलत', शिक्षक को नौकरी में दोबारा बहाल करने के दिए निर्देश

जबलपुर। अदालत ने दमोह के जिला शिक्षा अधिकारी को याचिकाकर्ता के मेरिट अंकों की फिर से समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि अगर याचिकाकर्ता ओबीसी वर्ग में चयन की पात्रता रखता है, तो उसे सेवा में बनाए रखा जाए।

बर्खास्त शिक्षक की याचिका पर सुनवाई

हाईकोर्ट ने यह फैसला दमोह के बर्खास्त प्राथमिक शिक्षक राहुल पटेल की याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता को 30 मार्च 2023 को ओबीसी/दिव्यांग श्रेणी के तहत प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था। उनकी पदस्थापना भटपुरा (असलाना) के स्कूल में की गई थी।

ये भी पढ़ें: श्योपुर : कूनो में राष्ट्रपति मुर्मू की चीता मित्रों से मुलाकात, चीता संरक्षण सहित कई विषयों पर चर्चा की

मेडिकल जांच के बाद हुई थी सेवा समाप्त

मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई जांच में याचिकाकर्ता की स्थायी विकलांगता निर्धारित 40 प्रतिशत से कम पाई गई थी। इसके बाद 24 जून 2024 को जिला शिक्षा अधिकारी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

Breaking News

याचिकाकर्ता की रैंक 7243 थी 

याचिकाकर्ता के वकील हितेन्द्र कुमार गोल्हानी ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल की कंसोलिडेटेड रैंक 7243 थी। मेरिट के आधार पर उनका चयन बिना किसी विकलांगता कोटे के भी सामान्य या ओबीसी ओपन श्रेणी में हो सकता था। इस आधार पर सेवा समाप्ति को गलत बताया गया।

ये भी पढ़ें: CG NEWS : छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 12 तहसीलदारों को मिला डिप्टी कलेक्टर का प्रमोशन, रायपुर-दुर्ग समेत कई जिलों में नई पोस्टिंग।

हाईकोर्ट ने प्रमाण पत्र को माना वैध

सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता का विकलांगता प्रमाण पत्र फर्जी नहीं था। कोर्ट ने कहा कि समय के साथ उसकी शारीरिक स्थिति में सुधार हुआ था। इसलिए केवल विकलांगता प्रतिशत कम होने को सेवा समाप्ति का आधार नहीं बनाया जा सकता।

डीईओ के आदेश पर जताई आपत्ति

हाईकोर्ट ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी ने जल्दबाजी में आदेश जारी किया और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया। अदालत के अनुसार अभ्यर्थी की मेरिट रैंक पर विचार ही नहीं किया गया। इसी कारण मामले में पुनः समीक्षा कर उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

Latest Posts