अफगानिस्तानी पत्रकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत, विदेशी अधिनियम के तहत दर्ज FIR निरस्त

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अफगानिस्तान के एक नागरिक और पत्रकार को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत दर्ज FIR को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई विदेशी नागरिक खुद अपने देश लौटने के लिए तैयार है, तो केवल वीजा अवधि से अधिक भारत में रुकने के मामले में आपराधिक कार्रवाई जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। इससे उसका भारत में अनावश्यक प्रवास और बढ़ सकता है।
यह मामला अफगानिस्तान के नागरिक सैयद राशिद सदत से जुड़ा है, जो दिसंबर 2019 में वीजा लेकर भारत आया था। कोविड महामारी के दौरान परिस्थितियां बदल गईं और वह भारत में ही रह गया। इसके बाद उसने संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) के सामने शरणार्थी के रूप में रहने के लिए आवेदन किया था।
चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने सुनाया फैसला
इस मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने सैयद राशिद सदत की अपील स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ दर्ज FIR को निरस्त करने का आदेश दिया।सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की परिस्थितियों पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि जब संबंधित विदेशी नागरिक अपने देश वापस जाने के लिए तैयार है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई जारी रखने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके बजाय ऐसी कार्रवाई उसके भारत में रहने की अवधि को और बढ़ा सकती है।
कोविड महामारी के दौरान भारत में रुक गया था अफगानी नागरिक
सैयद राशिद सदत दिसंबर 2019 में वीजा के आधार पर भारत आया था। हालांकि, कुछ समय बाद दुनिया में कोविड-19 महामारी फैल गई। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और आवागमन पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गई थीं। इसी परिस्थिति में सदत ने संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त के कार्यालय में शरणार्थी के रूप में रहने के लिए आवेदन किया। उसे शरणार्थी कार्ड भी जारी किया गया था। दूसरी ओर, उसकी वीजा अवधि समाप्त हो चुकी थी और उसने एग्जिट परमिट भी नहीं लिया था। इसी आधार पर भोपाल के कोलार रोड थाने में उसके खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा 14 के तहत FIR दर्ज की गई थी।
सिंगल बेंच से राहत नहीं मिली तो डिवीजन बेंच पहुंचा मामला
FIR निरस्त कराने के लिए सैयद राशिद सदत ने पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकलपीठ का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, 9 अक्टूबर 2025 को एकलपीठ ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने इस फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दाखिल की। अपील में मामले की परिस्थितियों और अपने देश लौटने की इच्छा से जुड़े पहलुओं को सामने रखा गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद डिवीजन बेंच ने उसे राहत देते हुए FIR निरस्त कर दी।
अधिवक्ता संकल्प कोचर और प्रखर शुक्ला ने की पैरवी
इस मामले में आवेदक की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर और प्रखर शुक्ला ने पैरवी की। उन्होंने अदालत के सामने मामले से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को रखा। हाईकोर्ट का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें अदालत ने विदेशी नागरिक की वापसी की इच्छा और उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई के व्यावहारिक प्रभाव पर विचार किया। अदालत की टिप्पणी के मुताबिक, जब व्यक्ति खुद अपने देश लौटना चाहता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई जारी रखना उसके भारत में रुकने की अवधि बढ़ाने का कारण बन सकता है।




















