High Court News : ओबीसी आरक्षण पर अब 24 जून को तय होगी सुनवाई की टाइमलाइन

जबलपुर। प्रदेश में ओबीसी के आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में दाखिल हुईं 91 याचिकाओं पर अब 24 जून को सुनवाई होगी। मंगलवार को ये मामले पहली बार प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच के समक्ष सूचीबद्ध हुए। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित गति से इन मामलों पर सुनवाई करने कहा है और पहली बार ये मामले उनके सामने लिस्ट हुए हैं, ऐसे में उनके सुनवाई की टाइमलाइन तय होना जरूरी है। इस मत के साथ बेंच ने 24 जून को आगे सुनवाई करने के निर्देश दिए।
ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने को चुनौती
गौरतलब है कि अशिता दुबे व अन्य की ओर से दायर कई मामलों में प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत किये जाने को चुनौती दी गई थी। वहीं कई याचिकाओं में आरक्षण का प्रतिशत 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किए जाने का समर्थन किया गया है। यानि हाईकोर्ट में ये मामले ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने के पक्ष और विपक्ष में दाखिल हुए हैं।
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2019 में मप्र सरकार ने बढ़ाया था आरक्षण
ध्यान रहे कि तत्कालीन सरकार ने 8 जुलाई 2019 को आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने के संबंध में विधानसभा से बिल पारित किया और फिर उसका गजट नोटिफिकेशन 17 जुलाई 2019 को प्रकाशित किया था। आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाए जाने को कई मामलों में असंवैधानिक और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों के खिलाफ बताया गया है।
पीएससी परीक्षाओं के मामलों पर कल होगी सुनवाई
वहीं, मप्र लोक सेवा आयोग द्वारा 158 पदों पर 25 मार्च 2025 को ली जाने वाली मुख्य परीक्षा पर पूर्व में लगाई गई रोक हाईकोर्ट ने मंगलवार को भी बरकरार रखी है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने इस मामले पर गुरुवार18 जून को अंतिम सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। भोपाल निवासी ममता डेहरिया की ओर से दायर कुल 11 याचिकाओं में राज्य सेवा भर्ती नियम 2015, पीएससी के 31 दिसंबर 2024 के विज्ञापन और सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 7 नवम्बर 2020 को जारी परिपत्रों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि आयोग ने कुल 158 पदों की भर्ती के लिए 5 मार्च 2025 को प्रारंभिक परीक्षा परिणाम तो घोषित किए, लेकिन इसमें वर्गवार कट-आफ अंक जारी नहीं किए और मुख्य परीक्षा की तारीख तय कर दी, जो असंवैधानिक है।












