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CG NEWS: फोन टैपिंग मामले में हाईकोर्ट सख्त: रविशंकर महाराज बनाम CBI केस में दोनों पक्षों से मांगा जवाब, 24 जून को होगी अगली सुनवाई।

नए दूरसंचार नियम 2024 के तहत फोन इंटरसेप्शन की वैधता पर उठा बड़ा कानूनी सवाल, CBI को भी जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फोन इंटरसेप्शन से जुड़े इस मामले में सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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फोन टैपिंग मामले में हाईकोर्ट सख्त: रविशंकर महाराज बनाम CBI केस में दोनों पक्षों से मांगा जवाब, 24 जून को होगी अगली सुनवाई।

RAIPUR NEWS। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में ‘श्री रविशंकर जी महाराज बनाम CBI’ मामले की सुनवाई के दौरान फोन टैपिंग से जुड़े कानूनी पहलुओं पर महत्वपूर्ण बहस हुई। कोर्ट ने नए दूरसंचार नियम 2024 के तहत जारी इंटरसेप्शन आदेश की वैधता को लेकर याचिकाकर्ता और CBI दोनों से विस्तृत जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 24 जून को निर्धारित की गई है।



हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगा शपथ पत्र

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने फोन इंटरसेप्शन से जुड़े इस मामले में सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 24 घंटे के भीतर अपना अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने और उसकी प्रति CBI को उपलब्ध कराने को कहा है।

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दूरसंचार नियम 2024 पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनु शर्मा ने दलील दी कि दूरसंचार नियम 2024 के नियम 3(3)(b) के अनुसार किसी भी फोन इंटरसेप्शन आदेश को सात कार्य दिवसों के भीतर रिव्यू कमेटी के समक्ष पुष्टि के लिए प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि निर्धारित समय में इसकी पुष्टि नहीं होती, तो आदेश स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है। याचिका में कहा गया कि 28 जून 2025 को जारी इंटरसेप्शन आदेश की समीक्षा प्रक्रिया पूरी नहीं होने की स्थिति में उसके आधार पर जुटाए गए साक्ष्यों की वैधता पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो जाता है।



कोर्ट ने स्पष्ट हलफनामा दाखिल करने कहा

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि मूल याचिका में इंटरसेप्शन आदेश को सीधे चुनौती नहीं दी गई थी। बाद में अतिरिक्त आधार जोड़ने के लिए अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया गया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मौखिक रूप से रखी गई सभी दलीलों को शामिल करते हुए नया और स्पष्ट शपथ पत्र दाखिल किया जाए।

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CBI को भी देना होगा जवाब

CBI की ओर से पेश अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन ने बताया कि इसी FIR से जुड़े एक अन्य सह-आरोपी की याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित है। इसके बाद कोर्ट ने CBI को केंद्र सरकार और सक्षम अधिकारियों से निर्देश प्राप्त कर 24 जून 2026 तक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।

Prem Nirmalkar
By Prem Nirmalkar
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