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MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मनरेगा के संविदा सब इंजीनियर नियमित नहीं होंगे, 1400 कर्मचारियों पर असर

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मनरेगा के संविदा सब इंजीनियरों के नियमितीकरण की मांग खारिज कर दी है। 10 साल से अधिक सेवा देने वाले कर्मचारियों की छह याचिकाएं खारिज होने से करीब 1,400 इंजीनियर प्रभावित हो सकते हैं।
MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मनरेगा के संविदा सब इंजीनियर नियमित नहीं होंगे, 1400 कर्मचारियों पर असर

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मनरेगा में संविदा आधार पर काम कर रहे सब इंजीनियरों के नियमितीकरण की मांग को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने सोमवार को इस संबंध में दायर आधा दर्जन याचिकाओं पर फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने 10 साल से अधिक समय तक सेवा देने के आधार पर नियमितीकरण की मांग की थी। इस फैसले का असर प्रदेश में कार्यरत करीब 1,400 संविदा सब इंजीनियरों पर पड़ सकता है।

10 साल से अधिक सेवा का दिया था हवाला

नर्मदापुरम जिला पंचायत में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत देवेंद्र कुमार उपाध्याय और अन्य की ओर से ये याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से राज्य सरकार को नियमितीकरण के निर्देश देने की मांग की थी। उनका तर्क था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई फैसलों में लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को नियमित करने की बात कही गई है। इसके अलावा, राज्य सरकार दूसरे विभागों में भी संविदा कर्मचारियों को नियमित कर चुकी है, लेकिन उनके मामले में ऐसा नहीं किया जा रहा है।

MP high court

552 पदों पर भर्ती का भी उठाया मुद्दा

याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी बताया गया कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग ने करीब 552 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है। उनका कहना था कि जब विभाग में पहले से ही करीब 1,400 संविदा सब इंजीनियर काम कर रहे हैं और उनमें से कई 10 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं, तो नई भर्ती से पहले उनके नियमितीकरण पर विचार किया जाना चाहिए।

एसोसिएशन ने भी उठाई थी मांग

मध्य प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन ने भी इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था। संगठन की मांग थी कि पहले से कार्यरत संविदा सब इंजीनियरों को नियमित किया जाए और इसके बाद ही शेष रिक्त पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने नियमितीकरण की मांग को स्वीकार नहीं किया और सभी छह याचिकाएं खारिज कर दीं।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

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