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पेड़ों से अवैध गोंद निकालने वालों पर हाईकोर्ट सख्त:9 ठेकेदारों के परमिट रद्द, कार्रवाई जारी रखने के निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुरहानपुर के जंगलों में अवैध गोंद दोहन मामले में 9 ठेकेदारों के परमिट रद्द करने की कार्रवाई पर संतोष जताया। कोर्ट ने सरकार को जंगलों की सुरक्षा के लिए सख्ती जारी रखने के निर्देश दिए।
9 ठेकेदारों के परमिट रद्द, कार्रवाई जारी रखने के निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुरहानपुर के संरक्षित जंगलों में सलाई और धवड़ा गोंद के अवैध दोहन के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि जिन ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है वह आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहनी चाहिए ताकि जंगलों और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वालों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ ठेकेदार लाइसेंस की आड़ में पेड़ों से अधिक मात्रा में गोंद निकालने के लिए खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था और कई पेड़ सूखने की स्थिति में पहुंच गए थे। याचिका में यह भी कहा गया कि सबूत मिटाने के लिए कई स्थानों पर जंगलों में आग लगाने जैसी घटनाएं भी सामने आईं, जो वन संरक्षण नियमों और पेसा कानून का उल्लंघन हैं।

सरकार ने कोर्ट को बताई कार्रवाई

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि मामले में अब तक 9 ठेकेदारों के परमिट तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं। इसके अलावा छापेमारी के दौरान 845.4 किलोग्राम अवैध गोंद बरामद किया गया है और तस्करी में इस्तेमाल किए गए वाहन को भी जब्त कर राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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संवेदनशील वन क्षेत्रों में बढ़ाई गई निगरानी

सरकार ने अदालत को बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए शाहपुर, बोदरली, खकनार और नेपानगर के संवेदनशील वन क्षेत्रों में विशेष पेट्रोलिंग टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों को लगातार निगरानी और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

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हाईकोर्ट ने कहा- सख्ती बनी रहनी चाहिए

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार की कार्रवाई पर संतोष जताया। अदालत ने कहा कि सरकार ने प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू किया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई भविष्य में भी लगातार जारी रहनी चाहिए। सरकार की रिपोर्ट और उठाए गए कदमों को देखते हुए हाईकोर्ट ने माना कि जनहित याचिका का उद्देश्य पूरा हो चुका है। इसके बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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