Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों के ट्रांसफर का रास्ता साफ

MP हाईकोर्ट ने ग्राम रोजगार सहायकों के ट्रांसफर नियमों को वैध ठहराया है। दूर की पंचायत में ट्रांसफर पर निवास बदलने की स्थिति में ट्रांसफर अलाउंस और HRA देने के लिए छह महीने में नीति बनानी होगी।
MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों के ट्रांसफर का रास्ता साफ

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य रोजगार गारंटी परिषद की ओर से 24 जून 2025 को जारी ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका के ट्रांसफर संबंधी नियमों को वैध ठहराया है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि दूर की ग्राम पंचायत में ट्रांसफर होने पर यदि कर्मचारी को अपना निवास बदलना पड़ता है, तो उसे ट्रांसफर अलाउंस और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) मिलना चाहिए।

जस्टिस विशाल धगट की सिंगल बेंच ने 14 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के छह महीने के भीतर भत्तों के संबंध में नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

तीन साल की सेवा के बाद हो सकेगा ट्रांसफर

यह फैसला सिंगरौली जिले के देवसर क्षेत्र के अमित कुमार मिश्रा और चार अन्य की याचिका पर आया है। याचिकाकर्ताओं ने 24 जून 2025 को जारी ग्राम रोजगार सहायक मार्गदर्शिका के क्लॉज 8.1, 8.2 और 8.3 को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनकी नियुक्ति स्थानीय निवासी होने की शर्त पर एक निश्चित ग्राम पंचायत में संविदा आधार पर हुई है। उनके अनुबंध में पद को गैर-स्थानांतरणीय बताया गया था। ऐसे में उन्हें दूसरी ग्राम पंचायत में भेजना उचित नहीं है।

नई मार्गदर्शिका के तहत तीन साल की सफल सेवा पूरी करने वाले ग्राम रोजगार सहायक को प्रशासनिक जरूरत के आधार पर उसी जिले की दूसरी ग्राम पंचायत में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके लिए कलेक्टर की मंजूरी जरूरी होगी। नई पंचायत में पदस्थापना के बाद कर्मचारी को नया संविदा अनुबंध करना होगा।

Breaking News

कोर्ट ने ट्रांसफर नियमों को माना वैध

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गोपेश तिवारी ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने कहा कि ग्राम रोजगार सहायकों की नियुक्ति संविदा आधार पर होती है। तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद पुराना अनुबंध समाप्त हो जाता है। प्रशासनिक जरूरतों और अनुशासन बनाए रखने के लिए जिले के भीतर ट्रांसफर की व्यवस्था की जा सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने मार्गदर्शिका के क्लॉज 8.1, 8.2 और 8.3 को वैध और संवैधानिक माना। यानी ग्राम रोजगार सहायकों की ट्रांसफर से छूट देने की मांग स्वीकार नहीं की गई।

दूर की पंचायत में ट्रांसफर पर मिलेगा भत्ता

हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की आर्थिक परेशानी को ध्यान में रखते हुए कहा कि यदि दूर की पंचायत में ट्रांसफर के कारण उन्हें अपना निवास बदलना पड़ता है, तो घर और सामान शिफ्ट करने का खर्च मिलना चाहिए। इसके साथ ही ट्रांसफर अलाउंस और मकान किराया भत्ता देने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।

कोर्ट ने राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को छह महीने के भीतर इस संबंध में नई नीति या प्रावधान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने मार्गदर्शिका के क्लॉज 8.7 को भी कर्मचारियों के कानूनी अधिकारों के खिलाफ माना है। इस तरह याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने ट्रांसफर के नियम बरकरार रखे, लेकिन भत्तों के मामले में कर्मचारियों को राहत दी है।

Sanjay Tiwari
By Sanjay Tiwari

Latest Posts