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बाड़ी आदिवासी सेवा संघ में गणवेश के 5.50 लाख रुपये पर विवाद, राशि निकली लेकिन बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिलने का आरोप

बाड़ी आदिवासी सेवा संघ के आश्रम में छात्र-छात्राओं की गणवेश के लिए निकाली गई 5.50 लाख रुपये की राशि को लेकर विवाद सामने आया है। सचिव ने भुगतान और नियुक्ति प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
बाड़ी आदिवासी सेवा संघ में गणवेश के 5.50 लाख रुपये पर विवाद

बाड़ी। आदिवासी सेवा संघ बाड़ी के आश्रम में छात्र-छात्राओं की गणवेश के नाम पर 5 लाख 50 हजार रुपये निकाले जाने का मामला विवादों में आ गया है। आरोप है कि राशि निकालने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद बच्चों को गणवेश उपलब्ध नहीं कराई गई। इस मामले को लेकर संस्था के पदाधिकारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। संस्था के सचिव प्रदीप चीचाम ने राशि के भुगतान, बिल-वाउचर और बैंक रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।

सचिव का आरोप- 5.50 लाख रुपये दिए, फिर भी नहीं मिली गणवेश

सचिव प्रदीप चीचाम के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में आश्रम के छात्र-छात्राओं की गणवेश व्यवस्था के लिए बैंक से 5.50 लाख रुपये निकाले गए थे। उनका आरोप है कि अध्यक्ष विजय सिंह बरकरे के निर्देश पर उन्होंने कोषाध्यक्ष जतन सिंह उईके के माध्यम से भोपाल की शुभजीत यूनिफॉर्म कंपनी के खाते में चेक दिया था। इसके बावजूद बच्चों को गणवेश नहीं मिली। चीचाम ने बैंक रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेज, बिल-वाउचर और गणवेश की आपूर्ति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि राशि किसे और किस आधार पर दी गई तथा भुगतान के बाद गणवेश की आपूर्ति क्यों नहीं हुई।

पद से हटाने के नोटिस पर भी विवाद

प्रदीप चीचाम ने कोषाध्यक्ष जतन सिंह उईके की संस्था में लंबे समय से पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कोषाध्यक्ष करीब 25 वर्षों से संस्था में अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष सहित विभिन्न पदों पर रहे हैं। चीचाम का कहना है कि उन पर कोषाध्यक्ष के निर्देशों के अनुसार काम करने का दबाव बनाया जाता था और विरोध करने पर पद से हटाने की चेतावनी दी जाती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने के बाद उन्हें पद से हटाने का नोटिस जारी कर दिया गया। सचिव ने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

अस्थायी सचिव की नियुक्ति पर उठाए सवाल

विवाद के बीच सचिव ने अध्यक्ष की ओर से पत्र क्रमांक 51, दिनांक 28 सितंबर 2026 के माध्यम से राजीव गौर को अस्थायी सचिव नियुक्त किए जाने की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए हैं। चीचाम का कहना है कि महासमिति की बैठक के बिना मौजूदा सचिव को हटाना और नए सचिव को बजट तथा सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार देना जांच का विषय है।

पदाधिकारियों ने रखे अपने-अपने पक्ष

मामले में संस्था के पदाधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों ने अलग-अलग पक्ष रखे हैं। सचिव प्रदीप चीचाम ने कहा कि उन पर दबाव बनाया गया और विरोध करने पर हटाने का नोटिस दे दिया गया। वहीं कोषाध्यक्ष जतन सिंह उईके ने कहा कि राशि उनके हस्ताक्षर से निकली है, लेकिन इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। अध्यक्ष विजय सिंह बरकरे ने कहा कि वे फिलहाल गांव में हैं और मामले की जानकारी नहीं है। वापस आने के बाद इस संबंध में बात करेंगे। आश्रम के प्राचार्य रामकुमार सिंह ठाकुर ने सचिव को हटाने की प्रक्रिया को वैधानिक नहीं बताया। उनका कहना है कि इस संबंध में निर्णय महासमिति को लेना चाहिए। वहीं, पूर्व अध्यक्ष विनोद इरपाचे ने कहा कि पिछले दो वर्षों से महासमिति की बैठक नहीं हुई है। जल्द बैठक बुलाकर कार्यकारिणी के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।

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भुगतान और नियुक्ति प्रक्रिया की जांच जरूरी

गणवेश की राशि निकालने के बावजूद बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिलने का आरोप कई सवाल खड़े कर रहा है। भुगतान किस खाते में और किन दस्तावेजों के आधार पर किया गया? कंपनी की ओर से गणवेश की आपूर्ति हुई या नहीं? स्टॉक रजिस्टर में कितनी गणवेश दर्ज हैं? सचिव को हटाने और अस्थायी सचिव नियुक्त करने की प्रक्रिया संस्था के नियमों के अनुरूप हुई या नहीं? इन सभी बिंदुओं पर बैंक रिकॉर्ड, भुगतान दस्तावेज, बिल-वाउचर, स्टॉक रजिस्टर और संस्था की बैठक के रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जरूरत है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Buddhi Sharma
By Buddhi Sharma

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