MP High Court:भोपाल-देवास रोड पर फास्टैग से ज्यादा टोल वसूली का मामला, हाईकोर्ट ने दिए ₹11 करोड़ लौटाने के आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वाहन मालिकों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है। भोपाल-देवास फोरलेन रोड पर फास्टैग के जरिए ज्यादा टोल वसूलने के मामले में टोल कंपनी को ₹11 करोड़ की राशि वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। यह राशि मल्टी एक्सल वाहन मालिकों को लौटाई जाएगी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कंपनी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराई जाए।
देवास-भोपाल कॉरिडोर कंपनी को देना होगा पैसा वापस
यह फैसला देवास-भोपाल कॉरिडोर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनाया गया। कंपनी भोपाल-देवास फोरलेन सड़क पर बीओटी (Build Operate Transfer) मॉडल के तहत टोल टैक्स वसूल रही है। कंपनी ने मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के 21 मई 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश में कंपनी को निर्देश दिया गया था कि वाहनों से वसूली गई अतिरिक्त टोल राशि वाहन मालिकों को वापस की जाए।
कंपनी ने दी थी यह दलील
याचिका में कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि इंडियन हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने तीन एक्सल वाली बसों को मल्टी एक्सल व्हीकल की श्रेणी में रखा था। कंपनी का कहना था कि इसी वर्गीकरण के आधार पर फास्टैग सिस्टम के जरिए टोल राशि अपने आप कटती रही। ऐसे में अतिरिक्त राशि कटने में उसकी कोई गलती नहीं थी।
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हाईकोर्ट ने खारिज की कंपनी की दलील
MP High Court की एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने कंपनी की दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि फास्टैग केवल टोल भुगतान का माध्यम है, यह टोल की दर तय करने का अधिकार नहीं देता। अगर गलत दर के आधार पर ज्यादा राशि वसूली गई है तो उसे वापस करना होगा।
सभी प्रभावित वाहन मालिकों को मिलेगा रिफंड
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि अतिरिक्त वसूली गई राशि सिर्फ किसी एक परिवहन कंपनी को नहीं बल्कि उन सभी वाहन संचालकों को लौटाई जानी चाहिए, जिनसे ज्यादा टोल लिया गया है। कोर्ट के इस फैसले से भोपाल-देवास मार्ग पर सफर करने वाले कई मल्टी एक्सल वाहन मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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राज्य सरकार ने भी रखा पक्ष
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और अधिवक्ता अन्वेष श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब टोल कंपनी को अतिरिक्त वसूली गई राशि की वापसी की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।












