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बेगमगंज :छुट्टी पर जा रहे चार डॉक्टरों ने दिखाई मानवता, सड़क पर तड़प रहे युवक को सीपीआर देकर बचाई जान

बेगमगंज सिविल अस्पताल के चार डॉक्टर पंचमढ़ी छुट्टी मनाने जा रहे थे, तभी बरेली-भोपाल फोरलेन पर सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को तड़पता देख उन्होंने अपनी यात्रा रोक दी। डॉक्टरों ने घायल को निजी वाहन में ले जाकर रास्ते भर सीपीआर दिया और समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचा ली। उनके इस मानवीय और त्वरित प्रयास की स्थानीय लोगों ने जमकर सराहना की।
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बेगमगंज। घायल को सीपीआर देते डॉक्टर।

बेगमगंज। बरेली-भोपाल फोरलेन मार्ग पर हुए एक गंभीर सड़क हादसे में घायल युवक के लिए बेगमगंज सिविल अस्पताल के चार डॉक्टर देवदूत बनकर सामने आए। तीन दिन की छुट्टी लेकर पंचमढ़ी घूमने जा रहे डॉक्टरों ने रास्ते में हादसा देखा तो बिना देर किए अपनी यात्रा रोक दी और गंभीर रूप से घायल युवक की जान बचाने में जुट गए।

सड़क पर पड़ा था घायल

जानकारी के अनुसार हादसे में चार लोग गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर पड़े थे। ग्रामीणों की सूचना पर डायल-112 मौके पर पहुंची और तीन घायलों को अपने वाहन से सिविल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन एक गंभीर घायल युवक नरेंद्र सिंह (35) निवासी ग्राम बनियाखेड़ी, बरेली सड़क पर ही पड़ा रह गया। उसी दौरान बेगमगंज सिविल अस्पताल के सीबीएमओ डॉ. नितिन सिंह तोमर, डॉ. चंद्रमोहन गुर्जर, डॉ. अमन सेन और डॉ. अभिषेक साहू पंचमढ़ी जा रहे थे।डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अपना निजी वाहन रोका और नरेंद्र सिंह को उसमें लिटाकर प्राथमिक उपचार शुरू किया। रास्ते भर डॉक्टरों ने युवक को लगातार सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) दिया और उसकी सांसें सामान्य बनाए रखने का प्रयास किया। इसके बाद उसे तत्काल सिविल अस्पताल बरेली पहुंचाकर भर्ती कराया, जहां समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बच गई।

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डॉक्टर  समय  पर नहीं पहुंचते तो मुश्किल था जान बचाना

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि डॉक्टर समय रहते मौके पर नहीं पहुंचते तो घायल की जान बचाना मुश्किल हो सकता था। डॉक्टरों ने अपनी छुट्टी और निजी कार्यक्रम से पहले मानवता को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकीय दायित्व निभाया। उनके इस सराहनीय कार्य की स्थानीय लोगों और अस्पताल स्टाफ ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। लोगों का कहना है कि ऐसे चिकित्सक समाज के लिए प्रेरणा हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि डॉक्टर का सबसे बड़ा धर्म मरीज की जान बचाना है।

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Anand Sharma
By Anand Sharma
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