MP High Court :‘आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने क्या कर रही सरकार?’ सुप्रीम कोर्ट से भेजे मामले पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

मप्र में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई इस स्वत: संज्ञान जनहित याचिका में हाईकोर्ट 'कंटिन्यूइंग मैंडमस' के तहत मामले की लगातार निगरानी करेगा। अदालत ने नगर निगम, पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करने
‘आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने क्या कर रही सरकार?’ सुप्रीम कोर्ट से भेजे मामले पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

जबलपुर। प्रदेश में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और मासूम बच्चों पर होने वाले जानलेवा हमलों के मामले पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा भेजे गए मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद शुक्रवार को सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने कहा है। मामले पर अगली सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।

जनहित याचिका केस दर्ज होगा

शीर्ष अदालत के आदेश के बाद अब प्रदेश के हाईकोर्ट में एक नया सुओ मोटो (स्वत: संज्ञान) जनहित याचिका मामला दर्ज होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के सहायक रजिस्ट्रार द्वारा भेजे गए निर्देश के आलोक में हाईकोर्ट रजिस्ट्री ने इस संबंध में प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पूरे मामले को ‘शहर आवारा कुत्तों के आतंक में, बच्चे चुका रहे हैं कीमत’  के तहत बेहद गंभीरता से लिया गया है।

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'कंटिन्यूइंग मैंडमस' के तहत होगी निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक आदेश में सभी राज्यों के हाईकोर्ट को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे इस मामले में एक नई स्वत: संज्ञान रिट याचिका दर्ज करें। इसे 'कंटिन्यूइंग मैंडमस' (सतत परमादेश) के रूप में रखा जाएगा, जिसका सीधा मतलब यह है कि जब तक इस समस्या का ठोस समाधान नहीं हो जाता और अदालती आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं होता, तब तक हाईकोर्ट इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग करता रहेगा। इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी।

पुराने मामले भी एक साथ होंगे टैग

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, सुप्रीम कोर्ट से स्थानांतरित किए गए सभी पुराने मामलों और आवेदनों के रिकॉर्ड (जिनमें रिट याचिका संख्या 2890/2020, 5/2022 और 15682/2025 शामिल हैं) को इस नई सुओ मोटो याचिका के साथ टैग (संलग्न) किया जाएगा। इन सभी मामलों की सुनवाई अब एक साथ होगी ताकि आवारा कुत्तों के प्रबंधन और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक सुदृढ़ व्यवस्था बनाई जा सके।

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अधिकारियों की लापरवाही पर कसेगा शिकंजा

अदालत के इस सख्त कदम से स्थानीय नगर निगमों, पशुपालन विभागों और जिला प्रशासनों पर दबाव बेहद बढ़ जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 22 अगस्त 2025 और 7 नवंबर 2025 को इस संबंध में कई कड़े निर्देश जारी किए थे। अब हाईकोर्ट द्वारा सीधी निगरानी किए जाने से जमीनी स्तर पर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। हाईकोर्ट रजिस्ट्री से इस जनहित याचिका को दर्ज करने की मंजूरी मिलते ही इस पर नियमित सुनवाई का दौर शुरू हो जाएगा।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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