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दमोह:किशनगढ़ धाम बना पर्यटकों की पहली पसंद, हरियाली; झरनों और ऐतिहासिक विरासत का अनूठा संगम

दमोह जिले का किशनगढ़ धाम वर्षा ऋतु में अपनी प्राकृतिक सुंदरता से लोगों को आकर्षित कर रहा है। हरियाली, झरनों और धार्मिक आस्था का संगम इस स्थल को खास पहचान दे रहा है।
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किशनगढ़ धाम बना पर्यटकों की प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद

दमोह। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ किशनगढ़ धाम ऐतिहासिक और जैव-विविधता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि आसपास के क्षेत्रों के साथ दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं।

बारिश में निखर उठी प्राकृतिक छटा

दमोह जिले की तेंदूखेड़ा तहसील और जबलपुर-दमोह जिले की सीमा के पास स्थित किशनगढ़ धाम वर्षा ऋतु में अपनी प्राकृतिक छटा से प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है। हरियाली से आच्छादित पहाड़ियां, ऊंची चट्टानों से गिरता झरना और धार्मिक आस्था का संगम इस स्थल को क्षेत्र के पर्यटन केंद्र में शामिल करते हैं।

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दूर-दराज से पहुंच रहे पर्यटक

यही कारण है कि आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से भी लोग यहां प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताने पहुंच रहे हैं। प्राकृतिक वातावरण और शांत माहौल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

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ऐतिहासिक विरासत की भी है पहचान

स्थानीय निवासी अरविंद यादव के अनुसार धाम के आसपास प्राचीन भग्नावशेष, पुराने निर्माणों के अवशेष और दीवारों के अंश आज भी मौजूद हैं। यह क्षेत्र की प्राचीनता और ऐतिहासिक विरासत की गवाही देते हैं और यहां चट्टानों में शिलाजीत मिलने का दावा भी किया जाता रहा है।

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जैव-विविधता और औषधीय पौधों का केंद्र

यह क्षेत्र जैव-विविधता और औषधीय संपदा की दृष्टि से भी समृद्ध है। गहरी खाई, नम और छायादार वातावरण, चट्टानों की दरारों में उगने वाले विशेष फर्न, काई और औषधीय लताएं इस क्षेत्र को आयुर्वेदिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।

Dheeraj Jonsan
By Dheeraj Jonsan
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