‘भू-माफिया की तरह काम कर रहा राजस्व विभाग’-किसान को मुआवजा दिए बिना रोड बनाने पर हाईकोर्ट ने लगाई डिंडौरी कलेक्टर को फटकार

जबलपुर। जमीन अधिग्रहण के नाम पर किसानों के हक पर डाका डालने और अदालत के सामने गलत रिपोर्ट पेश करने वाले राजस्व अधिकारियों के रवैये पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुसंगत दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर कोर्ट ने डिंडौरी कलेक्टर को खुद हाजिर होने को कहा है। डिंडौरी जिले के बजाग तहसील में एनएचएआई द्वारा किसान की निजी जमीन पर बिना मुआवजा दिए सड़क निर्माण के मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मामले पर राज्य सरकार और राजस्व विभाग को जमकर फटकार लगाई है। बेंच ने यहां तक कहा कि प्रकरण में प्रथम दृष्टया राज्य सरकार की बौद्धिक बेइमानी साफ नजर आ रही है। बेंच ने डिंडौरी कलेक्टर को कहा है कि वे अपना व्यक्तिगत हलफनामा 14 अगस्त तक पेश करें।
बिना मुआवजा दिए बना दिया नेशनल हाईवे
हाईकोर्ट ने ये निर्देश डिंडौरी जिले की बजाग तहसील के ग्राम मोहतरा में रहने वाले अंबिका प्रसाद तिवारी और उनके पुत्र जितेन्द्र तिवारी की ओर से दाखिल याचिका पर दिए। दरअसल, याचिकाकर्ताओं ने खसरा नंबर 1181 (रकबा 1.410 हेक्टेयर) और खसरा नंबर 1106 (रकबा 0.11 हेक्टेयर) की भूमि पर बिना अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाए और बिना मुआवजा दिए नेशनल हाईवे द्वारा सड़क बनाए जाने को चुनौती दी है।
आरोप-अधिकारियों ने झूठे दस्तावेज पेश किए
मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता धर्मेश चतुर्वेदी ने अदालत को बताया कि एसडीएम बजाग और नायब तहसीलदार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट पूरी तरह से कूटचरित और फर्जी है। उन्होंने अदालत का ध्यान आकर्षित कराया कि राज्य सरकार एक तरफ तो किसानों को चार गुना मुआवजा देने के लंबे-चौड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ उसके राजस्व अधिकारी अदालतों में झूठे दस्तावेज और गलत नक्शे पेश कर गरीब किसानों की जमीन हड़पने में लगे हैं।
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अफसरों पर गंभीर सवाल
अदालत ने भी माना कि सरकारी जवाब में न तो कोई सीमांकन रिपोर्ट संलग्न की गई है और न ही पुराना या नया राजस्व नक्शा पेश किया गया है। अधिकारियों की इस कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से यह हच-पच रिपोर्ट तैयार की गई है, वह राजस्व अधिकारियों की कार्यकुशलता और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कलेक्टर को चेतावनी
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा है कि यदि निर्धारित तिथि तक सुसंगत दस्तावेजों के साथ हलफनामा पेश नहीं किया गया, तो डिंडौरी कलेक्टर को 17 अगस्त 2026 को स्वयं हाई कोर्ट के समक्ष हाजिर होना पड़ेगा। मामले पर अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।
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