MP के सरकारी विभागों में दौड़ेंगे इलेक्ट्रिक वाहन: किराये पर मिलेगी ईवी सेवा, सीईएसएल का राज्य सरकार को प्रस्ताव

अशोक गौतम, भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों में जल्द ही पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन नजर आ सकते हैं। केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अधीन काम करने वाली कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) ने राज्य सरकार को 'ईवी एज ए सर्विस' मॉडल अपनाने का प्रस्ताव भेजा है। इस मॉडल के तहत विभागों को वाहन खरीदने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि उन्हें मासिक किराये यानी लीज मॉडल पर इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।
40 हजार से ज्यादा किराये के वाहनों को बदला जा सकता है
सीईएसएल ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि केंद्र सरकार स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर फोकस कर रही है। इसी दिशा में सरकारी विभागों में पारंपरिक ईंधन वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान में मध्यप्रदेश के विभिन्न विभागों, निगम-मंडलों और सार्वजनिक उपक्रमों में 40 हजार से अधिक वाहन किराये पर संचालित हो रहे हैं। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो इन वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जा सकता है।
विभागों को नहीं करना होगा पूंजी निवेश
ईवी एज ए सर्विस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि विभागों को वाहन खरीदने के लिए कोई शुरुआती निवेश नहीं करना पड़ेगा। विभाग केवल मासिक लीज शुल्क का भुगतान करेंगे। इसके बदले सीईएसएल वाहन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनका संचालन, रखरखाव, बीमा, रोड साइड सहायता और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था भी करेगी। हालांकि वाहनों के ड्राइवर संबंधित विभागों को ही उपलब्ध कराने होंगे।
सरकार कर रही लागत और बचत का अध्ययन
सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार के विभिन्न विभाग फिलहाल मौजूदा किराये के वाहनों की लागत और प्रस्तावित ईवी मॉडल की दरों का तुलनात्मक अध्ययन कर रहे हैं। इसके जरिए यह आकलन किया जा रहा है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से विभागों को कितनी आर्थिक बचत हो सकती है।
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कई राज्यों में काम कर रही है सीईएसएल
सीईएसएल, ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। केंद्र सरकार ने कंपनी को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी है। कंपनी देश के कई राज्यों में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, चार्जिंग स्टेशन विकसित करने और सरकारी संस्थानों में इलेक्ट्रिक वाहनों की तैनाती का काम कर रही है।
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ईंधन खर्च और प्रदूषण दोनों होंगे कम
ऊर्जा एवं पर्यावरण विशेषज्ञ प्रभात पांडीकर का कहना है कि यदि मध्यप्रदेश सरकार इस मॉडल को लागू करती है तो सरकारी परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इससे ईंधन खर्च कम होगा, कार्बन उत्सर्जन घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव पर विभिन्न विभागों के साथ चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।












