People's Interview : महेश केवट बोले-मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि राज्यसभा जाऊंगा

राज्यसभा के सदस्य के लिए निर्विरोध चुने गए मछुआ कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष-भाजपा नेता महेश केवट का कहना है कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि वे राज्यसभा जाएंगे।उन्होंने कहा कि मैं पार्टी का अनुशासित सिपाही हूं, पार्टी ने जैसा कहा वैसा किया।
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महेश केवट बोले-मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि राज्यसभा जाऊंगा

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए भाजपा नेता महेश केवट का कहना है कि मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उच्च सदन जाने का मौका मिलेगा। लेकिन पार्टी नेतृत्व सभी कार्यकर्ताओं का अभिभावक की तरह ध्यान रखता है। मैं तो अनुशासित सिपाही की तरह हर जवाबदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाता रहा। चाहे करनाल, शहडोल, चित्रकूट अथवा पृथ्वीपुर की चुनाव ड्यूटी हो या फिर मछुआ कल्याण बोर्ड की कमान। केवट बताते हैं पार्टी ने जब तीसरी सीट के लिए उनका नाम तय किया था तभी जीत भी सुनिश्चित हो गई थी।

पीपुल्स समाचार से हुई विशेष चर्चा में केवट ने राज्यसभा प्रत्याशी बनाए जाने से लेकर बुंदेलखंड के विकास, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दे पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्यसभा का नामांकन जमा करने से पहले ही मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष पद से उनका इस्तीफा मंजूर हो गया था। अब पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन 2047 के विकसित भारत की योजनाओं में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में अपनी भी सहभागिता निभाउंगा। प्रस्तुत है उनसे हुई चर्चा के प्रमुख अंश...

सवाल : राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचन हो गया, नामांकन भरते वक्त कितनी उम्मीद थी?

जवाब : पार्टी ने जब नाम तय किया था जीत तो तभी सुनिश्चित हो गई थी। कांग्रेस खुद अंतर्विरोध की शिकार है। मुझे अपनी पार्टी नेतृत्व के निर्णय पर पूरा भरोसा था।

सवाल : अब मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष का काम कैसे संभालेंगे?

जवाब : बोर्ड अध्यक्ष पद से मैंने नामांकन जमा करने के पहले ही इस्तीफा दे दिया था।

सवाल : आप ओरछा (बुंदेलखंड) से आते हैं। पूरे क्षेत्र में पलायन और रोजगार की समस्या है। इस बारे में कोई प्लान बनाया क्या?

जवाब : केंद्र और राज्य सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। केन-बेतवा प्रोजेक्ट पूरा होते ही पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी। क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से नई योजनाओं पर भी काम करेंगे।

सवाल : मछुआ कल्याण बोर्ड का अनुभव कैसा रहा, कितने दिन काम किया?

जवाब : एक महीने का ही समय मिला। कामकाज समझने के साथ बुरहानपुर, रायसेन और ओंकारेश्वर जाकर पारंपरिक मछुआरों से मुलाकात कर उनकी योजनाओं पर चर्चा की।

सवाल : उच्च सदन में जाकर कामकाज का फोकस बदल जाएगा, क्या तैयारी है?

जवाब : हां यह तो सही है, अपनी पार्टी के वरिष्ठों नेताओं का मार्गदर्शन मिल रहा है। मुख्य फोकस विकास पर ही रहेगा।

सवाल : इस संबंध में कोई मॉडल अथवा योजना है क्या?

जवाब : यूपी के बुंदेलखंड में विकास के लिए झांसी औद्योगिक क्षेत्र का मैंने अवलोकन किया था। अच्छा प्रयास है, हमारे यहां पहले से ही इस तरह के प्रयास चल रहे हैं।

सवाल : बुंदेलखंड में टीकमगढ़, छतरपुर और खजुराहो के बाद अब पन्ना को रेलवे से जोड़ने की योजना कहां तक पहुंची?

जवाब : पन्ना को रेल नेटवर्क से जोड़ने का प्रोजेक्ट दो हिस्सों में चल रहा है। हमारे सीनियर नेता इस बारे में फॉलोअप कर रहे हैं। मैं भी सहयोगी की भूमिका निभाउंगा।

सवाल : आप तो रामराजा सरकार के मंदिर की ड्यूटी में रहे हैं, इतना बड़ा पद मिलने के बाद क्या सोचते हैं?

जवाब : रामराजा सरकार का ही आशीर्वाद है। हम लोग कई पीढ़ियों उन्हीं के उपासक है। ओरछा के हरदौल मंदिर में सेवा देते हैं। अभी छोटा भाई मुकेश केवट व अन्य परिजन बैठते हैं।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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