21 साल बाद फिर सड़कों पर दौड़ीं सरकारी बसें, 2029 तक 75% ग्राम पंचायतों को जोड़ने का लक्ष्य

भोपाल। मध्यप्रदेश में करीब 21 साल के लंबे अंतराल के बाद सरकारी बस सेवा एक बार फिर शुरू हो गई है। 2 जनवरी 2005 से बंद मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसों के बाद अब अनंत चतुर्दशी के दिन सरकारी बस सेवा की नई शुरुआत की गई। शुरुआती चरण में भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के सात प्रमुख शहरों को इस सेवा से जोड़ा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक प्रदेश की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक बस सेवा पहुंचाई जाए।
पहले साल 1500 बसें चलाने की योजना
सरकार ने नई परिवहन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से विस्तार देने की योजना बनाई है। इसके तहत पहले साल 1500 बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद बसों की संख्या लगातार बढ़ाई जाएगी और 2031 तक 15 हजार बसें संचालित करने का लक्ष्य तय किया गया है। इस पूरी परिवहन सेवा को पीपीपी मॉडल यानी सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल पर चलाया जाएगा। इसमें निजी बस ऑपरेटर भी शामिल होंगे। निजी ऑपरेटरों को बस संचालन के साथ विज्ञापन और कार्गो के जरिए अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराने की योजना भी है।
सात प्रमुख शहरों से होगी शुरुआत
नई बस सेवा के शुरुआती चरण में भोपाल और इंदौर समेत सात शहरों को शामिल किया गया है। इनमें शहरों के बीच चलने वाली इंटरसिटी बसें और शहर के भीतर आवागमन के लिए इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। इंटरसिटी बसें अलग-अलग शहरों को आपस में जोड़ेंगी, जबकि इंट्रासिटी बसों के जरिए शहर के भीतर लोगों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी। सरकार की ओर से यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक सफर पर जोर दिया गया है।
ये भी पढ़ें: स्वामित्व योजना-मप्र हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, 22 हजार पटवारियों को बनाने होंगे 68 लाख किसानों के दस्तावेज
सात शहरों में कितनी बसें मिलेंगी
नई सेवा के तहत अलग-अलग शहरों के लिए बसों का आवंटन इस प्रकार किया गया है-
- इंदौर: कुल 145 बसें, इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं।
- भोपाल: कुल 106 बसें, इनमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं।
- जबलपुर: कुल 67 बसें, इनमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं।
- रीवा: 18 इंटरसिटी बसें।
- देवास: 10 इंटरसिटी बसें।
- कटनी: 3 इंटरसिटी बसें।
- भिंड: 2 इंटरसिटी बसें।
इस तरह शुरुआती चरण में कुल 351 बसों के साथ सेवा शुरू की गई है।
गांवों तक सार्वजनिक परिवहन पहुंचाने पर जोर
सरकारी बस सेवा दोबारा शुरू करने के पीछे सबसे बड़ा लक्ष्य ग्रामीण इलाकों को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना है। अभी कई गांवों में लोगों को निजी वाहनों या सीमित निजी यात्री सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। सरकार की योजना के अनुसार आने वाले वर्षों में बस नेटवर्क को धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा। 2029 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद बसों की संख्या बढ़ाकर 2031 तक 15 हजार करने की योजना है। नई व्यवस्था में ई-बसों का इस्तेमाल होने से सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के साथ प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
ये भी पढ़ें: बीयू का कारनामा : आंसरशीट में फर्स्ट डिवीजन पास स्टूडेंट्स को एजेंसी ने कर दिया फेल
21 साल बाद बदले स्वरूप में लौटी सरकारी बस सेवा
मध्यप्रदेश में राज्य परिवहन निगम की पुरानी सरकारी बस सेवा 2 जनवरी 2005 को बंद हो गई थी। इसके करीब 21 साल बाद अब नई व्यवस्था के तहत सरकारी बस सेवा को फिर शुरू किया गया है। हालांकि इस बार परिवहन व्यवस्था का स्वरूप पहले से अलग है। नई सेवा में ई-बसों को प्राथमिकता दी गई है और संचालन के लिए पीपीपी मॉडल अपनाया गया है। सरकार इसे शहरों से लेकर गांवों तक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क मजबूत करने की दिशा में एक नई व्यवस्था के तौर पर आगे बढ़ा रही है।




















