स्वामित्व योजना-मप्र हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, 22 हजार पटवारियों को बनाने होंगे 68 लाख किसानों के दस्तावेज

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने शुक्रवार को प्रांतीय पटवारी संघ की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें स्वामित्व योजना के लिए प्रदेश के 22 हजार पटवारियों को एक्जीक्यूटिव ऑफिसर बनाने के फैसले पर सवाल उठाए गए थे। जस्टिस एमएस भट्टी की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से याचिका की ग्राह्यता पर सवाल उठाए गए। इन आपत्तियों के चलते याचिका वापस लेने पर अदालत ने उसे खारिज कर दिया।
पटवारियों ने जताई थी आशंका
याचिका में पटवारी एसोसिएशन ने यह आशंका भी जताई थी कि स्वामित्व योजना के तहत संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड तैयार करने के दौरान भविष्य में मालिकाना हक, सीमांकन और बंटवारे जैसे विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। एसोसिएशन का कहना था कि ऐसी परिस्थितियों में पटवारियों को व्यक्तिगत रूप से कानूनी मामलों और मुकदमों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में सरकार द्वारा 13 अगस्त 2026 को लिया गया फैसला खारिज होने योग्य है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह और शासकीय अधिवक्ता प्रभांशु शुक्ल हाजिर हुए।
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यह है स्वामित्व योजना
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 68 लाख से अधिक उन किसानों के दस्तावेज तैयार कराने सरकार ने स्वामित्व योजना बनाई है, जिनके पास जमीन तो हैं, लेकिन दस्तावेज नहीं है। इस योजना के जरिए किसानों को उनकी जमीनों के दस्तावेज मिलेंगे, ताकि उनके जरिए वे बैंकों से लोन प्राप्त कर सकें। इन दस्तावेजों को तैयार करने की जिम्मेदारी सरकार ने प्रदेश के 22 हजार पटवारियों को सौंपी है।
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