अब नहीं मिलेगी मनचाही पोस्टिंग:डीआरपी की नई नीति लागू, मेडिकल कॉलेज स्तर पर होगा जिला आवंटन

मरीजों के लिहाज से मध्यप्रदेश सरकार ने जिला रेजिडेंसी प्रोग्राम (डीआरपी) में बड़ा बदलाव किया है। अब पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग उन्हीं जिलों में की जाएगी, जहां से संबंधित मेडिकल कॉलेज में सबसे अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सरकार का उद्देश्य जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूत करना और डॉक्टरों को क्षेत्र विशेष की बीमारियों का व्यावहारिक अनुभव दिलाना है।
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डीआरपी की नई नीति लागू, मेडिकल कॉलेज स्तर पर होगा जिला आवंटन
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भोपाल। नई डीआरपी नीति के तहत अब जिला आवंटन राज्य स्तर से नहीं, बल्कि संबंधित मेडिकल कॉलेज के डीन की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। प्रदेश को सात संभागीय क्लस्टर में बांटा गया है और पीजी डॉक्टरों की पोस्टिंग मरीजों के ड्रेनेज एरिया के आधार पर होगी। सरकार का मानना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। डीआरपी बैच-2 की प्रक्रिया 8 जुलाई से शुरू होगी।

मरीजों के ड्रेनेज एरिया के आधार पर होगी पोस्टिंग

नई व्यवस्था के तहत अब पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग उन जिलों में की जाएगी, जहां से संबंधित मेडिकल कॉलेज में सबसे अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। सरकार का मानना है कि इससे डॉक्टरों को क्षेत्र विशेष की बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझने का बेहतर अवसर मिलेगा। वहीं जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाएं भी मजबूत होंगी। यह बदलाव मरीजों और डॉक्टरों, दोनों के लिए लाभकारी माना जा रहा है।

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अब समिति करेगी जिला आवंटन

नई डीआरपी नीति के तहत प्रदेश को सात संभागीय क्लस्टर में बांटा गया है। अब जिला आवंटन राज्य स्तर से नहीं, बल्कि संबंधित मेडिकल कॉलेज के डीन की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय डीआरपी प्लेसमेंट एलोकेशन कमेटी करेगी। मालूम हो कि पीजी डॉक्टरों को पढ़ाई के दौरान एक महीने के लिए जिला अस्पताल में इंटर्नशिप करना अनिवार्य होता है। नई व्यवस्था से आवंटन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

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नई व्यवस्था और पुरानी प्रणाली में क्या अंतर है?

नई डीआरपी नीति का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पीजी रेजिडेंट डॉक्टर उन जिलों में सेवाएं देंगे, जहां से सबसे अधिक मरीज संबंधित मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इससे डॉक्टरों को स्थानीय बीमारियों का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों के बीच समन्वय मजबूत होगा। अब तक जिला आवंटन राज्य स्तर से किया जाता था। कई बार पीजी डॉक्टरों की मनचाही पोस्टिंग और कुछ जिलों में जरूरत से ज्यादा डॉक्टर पहुंचने जैसी शिकायतें भी सामने आती थीं।

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किस क्लस्टर में कौन से जिले शामिल किए गए

नई व्यवस्था के तहत भोपाल क्लस्टर में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, हरदा, नर्मदापुरम और बैतूल शामिल हैं। इंदौर क्लस्टर में इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर और खंडवा को रखा गया है। उज्जैन क्लस्टर में उज्जैन, रतलाम, देवास, मंदसौर, नीमच, शाजापुर और आगर-मालवा शामिल हैं। ग्वालियर क्लस्टर में ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर और गुना को शामिल किया गया है। जबलपुर क्लस्टर में जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, मंडला, डिंडौरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी, रीवा-शहडोल क्लस्टर में रीवा, सतना, शहडोल, अनूपपुर, सीधी, सिंगरौली और उमरिया, जबकि सागर क्लस्टर में सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ जिले शामिल किए गए हैं।

डीआरपी बैच-2 का शेड्यूल जारी

सरकार ने डीआरपी बैच-2 का शेड्यूल भी जारी कर दिया है। 8 से 11 जुलाई तक दर्पण पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। 13 और 14 जुलाई को जिला आवंटन की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद 20 जुलाई से डीआरपी बैच-2 की शुरुआत कर दी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया तय समय-सीमा में पूरी करने की तैयारी की गई है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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