वायरल गर्ल' केस में नया मोड़:फरमान की जमानत खारिज होते ही सनोज मिश्रा के गंभीर आरोप

सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में निष्पक्ष जांच नहीं होने का लगाया आरोप, कार्रवाई नहीं होने पर आमरण अनशन की चेतावनी; पुलिस बोली- साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी
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फरमान की जमानत खारिज होते ही सनोज मिश्रा के गंभीर आरोप
फाइल फ़ोटो

खरगोन। प्रयागराज महाकुंभ के दौरान चर्चित हुई कथित "वायरल गर्ल" प्रकरण में नया घटनाक्रम सामने आया है। नाबालिग को भगाने और उससे विवाह करने के आरोपी मोहम्मद फरमान की अग्रिम जमानत याचिका विशेष पॉक्सो न्यायालय, मण्डलेश्वर द्वारा खारिज किए जाने के बाद फिल्म निर्देशक सनोज मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर मध्य प्रदेश पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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वीडियो में सनोज मिश्रा ने आरोप लगाया कि मामले की जांच में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है और आरोपितों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई नहीं की गई तो वे जल्द ही खरगोन जिला मुख्यालय पर आमरण अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल मामले की सच्चाई सामने लाना है और जांच का दायरा उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों तक भी बढ़ाया जाना चाहिए।

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सनोज मिश्रा ने वीडियो में फिल्म निर्माता वसीम रिजवी (जैसा कि उन्होंने वीडियो में नाम लिया) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ कथित साजिश में उनकी भूमिका रही और नाबालिग को केरल ले जाकर विवाह कराने की कथित योजना में भी उनकी संलिप्तता थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम के पीछे आदिवासी लड़कियों और युवतियों के धर्म परिवर्तन की कथित साजिश है।

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हालांकि, सनोज मिश्रा द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और जिन लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि इस मामले में नाबालिग के परिजन पहले से ही इसे कथित "लव जिहाद" का मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर घर से ले जाया गया और बाद में उससे विवाह कराया गया।

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इसी बीच, विशेष पॉक्सो न्यायालय, मण्डलेश्वर ने आरोपी मोहम्मद फरमान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए माना कि आरोपी फिलहाल फरार है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस स्तर पर अग्रिम जमानत दिए जाने से साक्ष्यों से छेड़छाड़ और जांच प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को अग्रिम राहत देने से इनकार कर दिया। फरमान के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पॉक्सो अधिनियम तथा अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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