दिव्यांगता नहीं, हौसलों ने दिलाई पहचान:ट्राइसाइकिल से फूड डिलीवरी कर परिवार संभाल रहे राम सेवक, डांस में भी बना चुके हैं राष्ट्रीय पहचान

ग्वालियर के दिव्यांग युवक राम सेवक ट्राइसाइकिल से Zomato के लिए फूड डिलीवरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। रोजगार के साथ उन्होंने डांस में भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है और अपनी मेहनत से कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
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ट्राइसाइकिल से फूड डिलीवरी कर परिवार संभाल रहे राम सेवक, डांस में भी बना चुके हैं राष्ट्रीय पहचान
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सागर यादव, ग्वालियर। शहर के राम सेवक ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। ट्राइसाइकिल से ऑनलाइन फूड डिलीवरी कर अपने परिवार का सहारा बनने वाले राम सेवक आज अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। इतना ही नहीं, डांस के क्षेत्र में भी उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

रोजगार की तलाश में मुरैना से ग्वालियर पहुंचे

करीब एक साल पहले राम सेवक रोजगार की तलाश में मुरैना से ग्वालियर आए थे। दिव्यांग होने के कारण उन्हें कई जगह नौकरी नहीं मिली। उन्होंने ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो में भी आवेदन किया लेकिन शुरुआत में उनका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। हालांकि राम सेवक ने हार नहीं मानी। उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से कहा मुझे दिव्यांग नहीं, एक मेहनती कर्मचारी की तरह मौका देकर देखिए। उनके आत्मविश्वास और जज्बे ने अधिकारियों को प्रभावित किया और उन्हें काम मिल गया। आज वे ट्राइसाइकिल से शहर के अलग-अलग इलाकों में समय पर फूड डिलीवरी कर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।

परिवार की जिम्मेदारी भी निभा रहे

राम सेवक के पिता मजदूरी करते हैं। परिवार में सबसे बड़े होने के कारण तीन छोटे भाइयों की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर है। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज उनकी कमाई पूरे परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है।

डांस बना दूसरी पहचान

रोजगार के साथ-साथ डांस राम सेवक का सबसे बड़ा जुनून है। उन्होंने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के घर पर अभ्यास कर डांस सीखा। उनकी मेहनत रंग लाई और गंगटोक में आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर की डांस प्रतियोगिता में उन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया। दिनभर फूड डिलीवरी का काम करने के बाद भी वे नियमित रूप से डांस की प्रैक्टिस करते हैं। उनके डांस वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद किए जाते हैं।

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संघर्ष से सफलता तक का सफर

राम सेवक की जिंदगी संघर्षों से भरी रही लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

  • रोजगार की तलाश में मुरैना से ग्वालियर पहुंचे।
  • दिव्यांगता के कारण कई जगह नौकरी नहीं मिली।
  • जोमैटो में शुरुआती आवेदन भी अस्वीकार कर दिया गया।
  • आत्मविश्वास के दम पर मौका मिला और आज सफल डिलीवरी पार्टनर हैं।

काम भी, सपना भी

राम सेवक हर दिन ट्राइसाइकिल से फूड डिलीवरी करते हैं और खाली समय में डांस की प्रैक्टिस भी जारी रखते हैं।

  • रोज ट्राइसाइकिल से फूड डिलीवरी करते हैं।
  • नियमित रूप से डांस का अभ्यास करते हैं।
  • गंगटोक की डांस प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल कर चुके हैं।
  • परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां भी पूरी ईमानदारी से निभा रहे हैं।

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दिव्यांगता कमजोरी मेरी असली पहचान

राम सेवक कहते हैं दिव्यांगता मेरी कमजोरी नहीं है। मेरी असली पहचान मेरे हौसले और मेहनत हैं। मैं काम भी करता हूं और अपने डांस के शौक को पूरी लगन से जीता हूं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि इंसान की पहचान उसकी शारीरिक स्थिति से नहीं बल्कि उसके हौसले, आत्मविश्वास और मेहनत से बनती है। मजबूत इरादों के सामने हर चुनौती छोटी पड़ जाती है।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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