AI बताएगा किस इलाके में बढ़ेंगे मच्छर:एक महीने पहले मिलेगी चेतावनी, भोपाल से शुरुआत करेगा स्वास्थ्य विभाग

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। शहर में अब डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद लेने जा रहा है। विभाग एक ऐसा AI आधारित सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है जो यह पहले ही बता देगा कि शहर के किस इलाके में अगले एक महीने में मच्छरों के पनपने और बीमारी फैलने का सबसे ज्यादा खतरा है। इस सिस्टम की टेस्टिंग भोपाल में की जाएगी और सफल होने पर इसे पूरे मध्यप्रदेश में लागू किया जाएगा।
कैसे काम करेगा AI सिस्टम?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह सॉफ्टवेयर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों का डिजिटल डेटा विश्लेषण करेगा। इसमें पिछले वर्षों के डेंगू और मलेरिया के मामले, मच्छरों की ब्रीडिंग साइट्स, मरीजों की संख्या, रोकथाम के उपाय और बारिश के पूर्वानुमान जैसे कई डेटा शामिल होंगे। इन सभी आंकड़ों के आधार पर AI यह बताएगा कि अगले 30 दिनों में कौन से इलाके हाई रिस्क जोन बन सकते हैं।
पहले से होगी रोकथाम की तैयारी
AI रिपोर्ट मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग समय रहते कार्रवाई कर सकेगा। इसमें फॉगिंग, एंटी-लार्वा स्प्रे, घर-घर सर्वे, पानी जमा होने वाले स्थानों की सफाई और जागरूकता अभियान शामिल होंगे। विभाग का मानना है कि इस तकनीक से डेंगू और मलेरिया के मामलों में काफी कमी लाई जा सकेगी।
2030 तक मलेरिया मुक्त मध्यप्रदेश का लक्ष्य
राज्य सरकार ने 2030 तक मध्यप्रदेश को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। पिछले कुछ वर्षों में मच्छर जनित बीमारियों में कमी भी दर्ज की गई है। पांच जिले पहले ही मलेरिया मुक्त घोषित हो चुके हैं और डेंगू मामलों में भी करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आई है।
स्टाफ की कमी बनी बड़ी चुनौती
जहां एक ओर विभाग तकनीक को मजबूत करने की तैयारी कर रहा है वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की भारी कमी चिंता का विषय बनी हुई है। राजधानी भोपाल में प्रभावी सर्वे और नियंत्रण कार्यों के लिए लगभग 450 कर्मचारियों की जरूरत है जबकि वर्तमान में केवल 50 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में हाई रिस्क इलाकों की पहचान के बाद भी तुरंत कार्रवाई करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ड्रोन योजना भी अभी तक अधूरी
मच्छरों पर नियंत्रण के लिए पिछले वर्ष ड्रोन से एंटी-लार्वा स्प्रे करने की योजना बनाई गई थी लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह योजना अभी तक लागू नहीं हो सकी है।
अधिकारियों का बयान
स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. हिमांशु जैसवार ने कहा कि विभाग के प्रयासों से मच्छर जनित मामलों में लगातार कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि AI आधारित सॉफ्टवेयर से हाई रिस्क क्षेत्रों की सटीक पहचान संभव होगी और मलेरिया को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य है।
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मध्यप्रदेश और भोपाल के आंकड़े
मध्यप्रदेश
| वर्ष | 2025 | 2026 |
| डेंगू | 478 | 467 |
| मलेरिया | 539 | 294 |
भोपाल
| वर्ष | 2025 | 2026 |
| डेंगू | 88 | 37 |
| मलेरिया | 05 | 04 |












