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बसंत पंचमी 2026 :धार भोजशाला में होगी पूजा और नमाज, SC ने तय किया अलग-अलग टाइम

मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला में 23 जनवरी बसंत पंचमी पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के धार्मिक आयोजनों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित फैसला सुनाया। प्रशासन ने सुरक्षा पुख्ता की, 8,000 पुलिसकर्मी तैनात किए, ड्रोन और AI निगरानी के साथ परिसर में अलग-अलग प्रवेश मार्ग और विशेष स्थान सुनिश्चित किए गए हैं।
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धार भोजशाला में होगी पूजा और नमाज, SC ने तय किया अलग-अलग टाइम
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली/धार। मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक स्थल भोजशाला को लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के धार्मिक अधिकारों को लेकर विवाद चला आ रहा है। इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अब बसंत पंचमी 2026 के मौके पर दोनों पक्षों के लिए संतुलित और शांतिपूर्ण व्यवस्था तय की है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय अपने धार्मिक आयोजन कर सकते हैं, लेकिन प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से शांति बनाए रखना अनिवार्य होगा।

    भोजशाला विवाद वर्षों से चल रहा है। विशेष रूप से बसंत पंचमी और जुमे के दिन पर दोनों समुदायों के बीच टकराव के खतरे रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बार मामले की सुनवाई करते हुए साफ निर्देश दिए कि, दोनों पक्ष आपसी सम्मान और अनुशासन बनाए रखें।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि-

    • हिंदू पक्ष सुबह से दोपहर 12 बजे तक पूजा और अनुष्ठान कर सकेगा।
    • इसके बाद मुस्लिम पक्ष दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा करेगा।
    • शाम 4 बजे से हिंदू पक्ष फिर से पूजा और धार्मिक अनुष्ठान कर सकेगा।

    अदालत ने आदेश में यह भी कहा कि, दोनों पक्षों के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग सुनिश्चित किए जाएँ, ताकि किसी भी तरह का तनाव न पैदा हो।

    प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिए गए कि, कानून-व्यवस्था बनाए रखें और किसी भी पक्ष की पूजा या नमाज में बाधा न आने दें।

    सुप्रीम कोर्ट की यह व्यवस्था दोनों पक्षों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करते हुए सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

    पक्षों की दलीलें

    हिंदू पक्ष की दलील

    हिंदू पक्ष ने कोर्ट को बताया कि कल 23 जनवरी, 2026 को बसंत पंचमी है, और इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा, हवन और पारंपरिक अनुष्ठान होंगे। वकील ने यह भी कहा कि, पिछले वर्षों में भी बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती रही है, और इस दिन हिंदू समुदाय ने परंपरागत पूजा की है। हिंदू पक्ष ने सुझाव दिया कि, मुस्लिम पक्ष की नमाज शाम 5 बजे के बाद कराई जाए ताकि पूजा निर्बाध चल सके।

    मुस्लिम पक्ष की दलील

    मस्जिद पक्ष ने कोर्ट को बताया कि, जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता, लेकिन अन्य नमाजों के समय में बदलाव संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा की जाएगी और इसके बाद परिसर खाली कर दिया जाएगा।

    अदालत की प्रतिक्रिया

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि, दोनों पक्षों को एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने भोजशाला परिसर में हिंदू और मुस्लिम दोनों के लिए अलग जगह और प्रवेश-निकास मार्ग सुनिश्चित कर दिए हैं।

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    सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां

    भोजशाला और धार शहर में सुरक्षा की व्यापक तैयारियां की गई हैं।

    • 8,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
    • इंदौर रेंज के आईजी अनुराग सिंह ने बताया कि, 50 प्रतिशत फोर्स बुधवार रात तक पहुंच चुका था।
    • ड्रोन और AI तकनीक से भीड़ की निगरानी की जा रही है। AI सिस्टम से वास्तविक समय में भीड़ की संख्या, दिशा और अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत का अनुमान लगाया जा सकता है।
    • भोजशाला के 300 मीटर क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में ड्रोन, हॉट एयर बैलून, पैरा ग्लाइडिंग और अन्य उड़ान गतिविधियों पर पूरी तरह पाबंदी है।
    • भारी वाहनों और शहर के ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक मार्ग और डायवर्जन प्लान बनाए गए हैं।
    • सभी मोहल्लों और प्रमुख रास्तों पर पुलिस की सतत निगरानी रहेगी। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी वाहन या व्यक्ति सुरक्षा नियमों का उल्लंघन न करे।

    भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व

    • भोजशाला का निर्माण 1034 में परमार शासक राजा भोज ने करवाया। इसका उद्देश्य विद्या का प्रचार-प्रसार और मां सरस्वती की आराधना था। यह नालंदा और तक्षशिला की तरह एक विशाल संस्कृत विश्वविद्यालय था।
    • भवन में सैकड़ों अलंकृत लाल स्तंभ और देवी-देवताओं की मूर्तियां थी।
    • यहां माघ, बाणभट्ट, कालिदास, भवभूति, भास्कर भट्ट और अन्य विद्वानों ने अध्ययन और शिक्षा दी।
    • यज्ञकुंड भवन के मध्य में स्थित था।
    • सन 1035 में मां सरस्वती की अप्रतिम प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा बसंत पंचमी के दिन हुई।
    • राजा भोज स्वयं विद्वान होने के साथ-साथ विद्वानों के संरक्षक भी थे। उन्हें 36 आयुध विज्ञान और 72 कलाओं का ज्ञान था। उन्होंने मंदिर, घाट, तालाब और विद्यालयों का निर्माण करवाया।

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    विवादों का इतिहास

    भोजशाला में धार्मिक विवाद वर्षों से चल रहा है।

    1995-1997: इस दौरान मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की अनुमति दी गई थी।

    12 मई 1997: कलेक्टर ने आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया और मंगलवार की पूजा पर रोक लगा दी।

    31 जुलाई 1997: यह प्रतिबंध हटा दिया गया।

    6 फरवरी 1998: केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने आगामी आदेश तक परिसर पर प्रवेश पर रोक लगाई।

    2003: सांप्रदायिक तनाव के बाद मंगलवार और बसंत पंचमी को पूजा, शुक्रवार को नमाज की अनुमति तय की गई।

    2013 और 2016: जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन आए, तो टकराव के कारण पुलिस को हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा।

    इस तरह भोजशाला का इतिहास धार्मिक और सांप्रदायिक संवेदनाओं से जुड़ा रहा है।

    मुस्लिम शासनकाल का प्रभाव

    1269: अलाउद्दीन खिलजी ने धार आकर इस्लामी राज्य स्थापित किया।

    1305: भोजशाला सहित कई धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया।

    1514: मेहमूद शाह खिलजी द्वितीय ने कमाल मौलाना की याद में मकबरा बनवाया।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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