Shivani Gupta
22 Jan 2026
नई दिल्ली/धार। मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक स्थल भोजशाला को लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के धार्मिक अधिकारों को लेकर विवाद चला आ रहा है। इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अब बसंत पंचमी 2026 के मौके पर दोनों पक्षों के लिए संतुलित और शांतिपूर्ण व्यवस्था तय की है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि, हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय अपने धार्मिक आयोजन कर सकते हैं, लेकिन प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से शांति बनाए रखना अनिवार्य होगा।
भोजशाला विवाद वर्षों से चल रहा है। विशेष रूप से बसंत पंचमी और जुमे के दिन पर दोनों समुदायों के बीच टकराव के खतरे रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बार मामले की सुनवाई करते हुए साफ निर्देश दिए कि, दोनों पक्ष आपसी सम्मान और अनुशासन बनाए रखें।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि-
अदालत ने आदेश में यह भी कहा कि, दोनों पक्षों के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग सुनिश्चित किए जाएँ, ताकि किसी भी तरह का तनाव न पैदा हो।
प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिए गए कि, कानून-व्यवस्था बनाए रखें और किसी भी पक्ष की पूजा या नमाज में बाधा न आने दें।
सुप्रीम कोर्ट की यह व्यवस्था दोनों पक्षों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करते हुए सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
हिंदू पक्ष की दलील
हिंदू पक्ष ने कोर्ट को बताया कि कल 23 जनवरी, 2026 को बसंत पंचमी है, और इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा, हवन और पारंपरिक अनुष्ठान होंगे। वकील ने यह भी कहा कि, पिछले वर्षों में भी बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती रही है, और इस दिन हिंदू समुदाय ने परंपरागत पूजा की है।
मुस्लिम पक्ष की दलील
मस्जिद पक्ष ने कोर्ट को बताया कि, जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता, लेकिन अन्य नमाजों के समय में बदलाव संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज अदा की जाएगी और इसके बाद परिसर खाली कर दिया जाएगा।
अदालत की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि, दोनों पक्षों को एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने भोजशाला परिसर में हिंदू और मुस्लिम दोनों के लिए अलग जगह और प्रवेश-निकास मार्ग सुनिश्चित कर दिए हैं।
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भोजशाला और धार शहर में सुरक्षा की व्यापक तैयारियां की गई हैं।
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भोजशाला में धार्मिक विवाद वर्षों से चल रहा है।
1995-1997: इस दौरान मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज की अनुमति दी गई थी।
12 मई 1997: कलेक्टर ने आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया और मंगलवार की पूजा पर रोक लगा दी।
31 जुलाई 1997: यह प्रतिबंध हटा दिया गया।
6 फरवरी 1998: केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने आगामी आदेश तक परिसर पर प्रवेश पर रोक लगाई।
2003: सांप्रदायिक तनाव के बाद मंगलवार और बसंत पंचमी को पूजा, शुक्रवार को नमाज की अनुमति तय की गई।
2013 और 2016: जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन आए, तो टकराव के कारण पुलिस को हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज करना पड़ा।
इस तरह भोजशाला का इतिहास धार्मिक और सांप्रदायिक संवेदनाओं से जुड़ा रहा है।
1269: अलाउद्दीन खिलजी ने धार आकर इस्लामी राज्य स्थापित किया।
1305: भोजशाला सहित कई धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया गया।
1514: मेहमूद शाह खिलजी द्वितीय ने कमाल मौलाना की याद में मकबरा बनवाया।