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दिन में सम्मान का ऐलान, रात में ट्रांसफर :साइकिल से गांव-गांव जाने वाले अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह की अचानक क्यों हुई विदाई?

मध्य प्रदेश सरकार ने अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह का अचानक तबादला कर साकेत मालवीय को नया कलेक्टर नियुक्त किया। आदित्य सिंह को भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग में उप सचिव बनाया गया। यह कदम आनंदपुर धाम ट्रस्ट की शिकायत और जिले में प्रशासनिक विवादों के बीच आया।
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साइकिल से गांव-गांव जाने वाले अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह की अचानक क्यों हुई विदाई?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोकनगर। मध्य प्रदेश सरकार ने बुधवार रात अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह का अचानक ट्रांसफर कर दिया। उनके स्थान पर साकेत मालवीय (2019 बैच IAS) को अशोकनगर का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया। वहीं आदित्य सिंह को भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग में उप सचिव का प्रभार दिया गया।

    अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह के तबादले के पीछे प्रमुख कारण आनंदपुर ट्रस्ट के नामांतरण प्रकरण में रिश्वत मांगने के आरोप बताए जा रहे हैं। इस मामले की शिकायत बीजेपी के केंद्रीय संगठन तक पहुंचने के बाद संगठन स्तर पर नाराजगी सामने आई, जिसके चलते प्रशासनिक कार्रवाई का निर्णय लिया गया। इसके बाद सिंह को हटाने का फैसला किया गया और उनकी जगह नई नियुक्ति के लिए तीन अधिकारियों के नामों का पैनल चुनाव आयोग को भेजा गया। हालांकि, आनंद धाम की ओर से की गई शिकायत का कोई आधिकारिक पत्र सामने नहीं आया है।

    दिन में सम्मान, रात में ट्रांसफर

    दिलचस्प बात यह है कि, आदित्य सिंह को बुधवार दिन में ही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए 25 जनवरी को राज्यपाल द्वारा सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई थी। सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में रैली और आमसभा की तैयारी भी चल रही थी। लेकिन रात होते-होते अचानक उनका ट्रांसफर आदेश जारी हो गया, जिससे प्रशासनिक हलचल मची और कई राजनीतिक सवाल उठने लगे।

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    कलेक्टर आदित्य सिंह के बारे में जानें

    आदित्य सिंह अपने कार्यकाल में अपनी सक्रियता और जनता के पास रहने के लिए अशोकनगर में काफी लोकप्रिय रहे। वे सप्ताह में दो-तीन दिन गांवों का दौरा करते और सीधे लोगों की समस्याएं सुनते थे। कई बार वे साइकिल से भ्रमण करते और ग्रामीणों से मिलते। बारिश के दौरान जब जिले में बाढ़ आई, तो वे खुद आधी रात को रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल हुए। उनके कार्यकाल में जनसुनवाई में करीब 1200 आवेदक भाग लेते थे। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सार्वजनिक मंचों से कई बार उनकी प्रशंसा की।

    आदित्य सिंह 2014 बैच के IAS अधिकारी हैं और IIT रुड़की से पेपर टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं। उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण और जनता के साथ प्रत्यक्ष संवाद की शैली ने उन्हें जिले में काफी सम्मान दिलाया।

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    आनंदपुर धाम: धार्मिक और प्रशासनिक महत्व

    आनंदपुर धाम, अशोकनगर में अद्वैत मत का प्रमुख और प्रभावशाली आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है। इसकी स्थापना लगभग वर्ष 1930 में स्वरूप आनंद महाराज द्वारा की गई थी। समय के साथ यह आश्रम एक विशाल और अत्याधुनिक परिसर के रूप में विकसित हुआ है। यह लगभग 1500 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां तीन निजी बस स्टैंड, चार हेलीपैड, वाहन वर्कशॉप और आधुनिक मशीनों से युक्त व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

    परिसर में फायर ब्रिगेड, सीसीटीवी निगरानी और निजी सुरक्षा व्यवस्था की सुविधा है, जबकि इसकी ऊंची दीवारें किले जैसी संरचना का आभास कराती हैं और प्रवेश द्वार पूरी तरह गार्डेड हैं।

    आश्रम के भीतर सुंदर पार्क, साफ-सुथरी और चौड़ी सड़कें हैं, जो इसे एक सुव्यवस्थित नगर जैसी पहचान देती हैं। ट्रस्ट द्वारा संचालित तीन स्कूल और एक अस्पताल भी यहां स्थित हैं, जहां शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सभी सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

    अनुयायी और क्षेत्रीय फैलाव

    देशभर में आनंदपुर धाम के अनुयायियों का व्यापक नेटवर्क फैला हुआ है। इसके अनुयायी कम से कम 10 राज्यों में सक्रिय रूप से मौजूद हैं। विशेष रूप से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड और दिल्ली में ट्रस्ट की मजबूत पैठ मानी जाती है।

    यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समर्थक जुड़े हुए हैं। ट्रस्ट से जुड़े धार्मिक आयोजनों में वैशाखी, व्यास पूजा और दीपावली को प्रमुख उत्सवों के रूप में मनाया जाता है। जिनमें हजारों की संख्या में अनुयायी भाग लेते हैं और बड़े स्तर पर धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

    अद्वैत मत का दर्शन

    अद्वैत मत का शाब्दिक अर्थ है “दो का अभाव”, यानी द्वैत का न होना। यह वेदांत दर्शन की एक प्रमुख धारा है, जिसके अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है और आत्मा व परमात्मा में कोई भेद नहीं होता। दोनों मूलतः एक ही तत्व के रूप हैं।

    आश्रम परिसर में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष मार्ग, बैरिकेडिंग और सख्त सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है, ताकि भीड़ नियंत्रण, अनुशासन और व्यवस्था बनी रहे और दर्शन व आयोजनों के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

    संस्थापक और इतिहास

    • परमहंस अद्वैत मत के संस्थापक परमहंस दयाल महाराज।
    • 1954 में आनंदपुर ट्रस्ट की स्थापना हुई।
    • सिंध प्रांत से उत्पन्न यह संप्रदाय स्वतंत्र भारत में कई राज्यों में फैला।
    • चार गुरुओं की समाधि यहां स्थित, मंदिर संगमरमर से निर्मित।

    ट्रस्ट का सामाजिक योगदान

    • आश्रम में साधु, साध्वी, भगत सहित करीब 1500 लोग रहते हैं।
    • बच्चों की पढ़ाई, ड्रेस और खाना मुफ्त।
    • हॉस्पिटल में इलाज और दवाइयां मुफ्त।
    • ट्रस्ट जिला स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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