ईरान-अमेरिका युद्ध का असर:हवाई टिकटों में उछाल! एयर इंडिया ने लगाया नया सरचार्ज

ईरान में चल रहे तनाव और युद्ध की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी आई है। इसके सीधे असर से जेट फ्यूल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। अब एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के लिए धीरे-धीरे फ्यूल सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है, जिससे हवाई सफर महंगा हो गया है।
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टाटा ग्रुप की एयरलाइन ने बताया कि यात्रियों को अब अपने टिकट पर ज्यादा पैसे देने होंगे। एयर इंडिया के मुताबिक, फरवरी के अंत से जेट फ्यूल की कीमतें 55 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ चुकी हैं।
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क्यों बढ़ा फ्यूल सरचार्ज?
एयर इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, मार्च 2026 की शुरुआत से एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह खाड़ी क्षेत्र में सप्लाई में रुकावटें हैं।

भारतीय एयरलाइंस के लिए, फ्यूल ऑपरेटिंग कॉस्ट का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा होता है। कीमतों में यह बड़ा उछाल सीधे टिकट पर असर डालता है। वेस्ट एशिया के बड़े हब में रुकावटें आने से फ्लाइट्स के रूट बदलने पड़े हैं। इस वजह से यूरोप, भारत, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के लिए उड़ानों की योजना प्रभावित हुई है।
ब्रिटिश एयरवेज ने भी घोषणा की है कि अब वह इस साल के अंत तक अबू धाबी जाने वाली सभी फ्लाइट्स कैंसिल कर देगा।
एयर इंडिया के फ्यूल सरचार्ज की नई दरें
एयर इंडिया ने दो चरणों में फ्यूल सरचार्ज लागू करने की योजना बनाई है।
पहला चरण- 12 मार्च से लागू
- देश के अंदर की फ्लाइट्स: नई बुकिंग पर 499 रुपए का फ्यूल सरचार्ज लगेगा।
- SAARC देश: इन देशों की फ्लाइट्स पर भी 499 रुपए का फ्यूल सरचार्ज लगाया जाएगा।
- वेस्ट एशिया / मिडिल ईस्ट: जैसे UAE की फ्लाइट्स पर दस डॉलर का फ्यूल सरचार्ज लगेगा।
- साउथ ईस्ट एशिया: इन रूट्स पर सरचार्ज 40 डॉलर से बढ़कर 60 डॉलर हो जाएगा।
- अफ्रीका: अफ्रीका जाने वाली फ्लाइट्स पर सरचार्ज 60 डॉलर से बढ़कर 90 डॉलर हो जाएगा।
दूसरा चरण- 18 मार्च से लागू
- यूरोप: यूरोप जाने वाली फ्लाइट्स का फ्यूल सरचार्ज 100 डॉलर से बढ़कर 150 डॉलर होगा।
- नॉर्थ अमेरिका: अमेरिका के रूट्स पर सरचार्ज 150 डॉलर से बढ़कर 200 डॉलर कर दिया गया है।
- ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया जाने वाली फ्लाइट्स का सरचार्ज भी 150 डॉलर से बढ़ाकर 200 डॉलर कर दिया गया है।
यात्रियों के लिए क्या मतलब?
फ्यूल की बढ़ती कीमतें सीधे हवाई यात्रा की लागत में बदल रही हैं। घरेलू यात्रियों को मामूली बढ़ोतरी महसूस होगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को ज्यादा फर्क पड़ेगा। एयरलाइंस को भी अब फ्लाइट रूट बदलने और ईंधन की अधिक लागत को मैनेज करना मुश्किल हो रहा है।
विशेष रूप से वेस्ट एशिया और यूरोप जाने वाले यात्रियों को अपने ट्रिप के खर्च को ध्यान से प्लान करना होगा। एयर इंडिया ने यह बदलाव ईंधन की बढ़ती लागत के दबाव को कम करने और अपनी सेवा को सतत बनाए रखने के लिए किया है।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय तनाव हवाई यात्रा के महंगे होने का मुख्य कारण हैं।घरेलू, SAARC और वेस्ट एशिया के रूट्स पर कम बढ़ोतरी, जबकि यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के रूट्स पर ज्यादा बढ़ोतरी होगी। इस समय यात्रियों को अपने बजट के अनुसार टिकट बुक करना जरूरी है।











