मध्यप्रदेश कॉलोनी अधिनियम 2026 का ड्रॉफ्ट तैयार:अवैध कॉलोनियां काटने पर 10 साल की सजा, 5 करोड़ तक जुर्माना

अशोक गौतम, भोपाल। अधिनियम शासकीय कॉलोनियों के साथ भोपाल, महू, ग्वालियर, जबलपुर समेत सातों कंटोनमेंट क्षेत्रों में लागू होगा। कॉलोनाइजरों के लिए इंटरनल डेवलपमेंट की समय सीमा तय की गई है। अवैध और अनाधिकृत कॉलोनियों को लेकर अधिकारियों और पुलिस की जवाबदेही भी निर्धारित की जाएगी। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
इंटरनल डेवलपमेंट करना होगा जरूरी
कॉलोनाइजर को पांच साल के अंदर सड़क, पानी, बिजली, सीवेज सहित अन्य इंटरनल विकास करना जरूरी होगा। नगर निगम और टीएनसीपी के अधिकारी कॉलोनाइजरों को विशेष परिस्थिति में दो वर्ष तक का समय और दे सकता है, इससे ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकेगा। अगर कॉलोनाइजर अनुमति लेने के बाद भी कॉलोनी नहीं काटता है तो वह एक साल के अंदर लाइसेंस निरस्त करा सकेगा। नए प्रावधानों के तहत विकास कार्यों की समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इससे अधूरी कॉलोनियों की समस्या को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
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संक्रमण वाले क्षेत्रों में निगरानी
शहर, एनएच और स्टेट हाइवे, विमानतल के आसपास के क्षेत्रों को संक्रमणशील क्षेत्र कहा गया है। इनके आसपास कॉलोनी काटने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी। कॉलोनी की अनुमति भी शहरी मानदंडों के अनुसार दी जाएगी। निवेश क्षेत्र से 16 किलोमीटर की दूरी पर इसका कड़ाई से पालन किया जाएगा। इन क्षेत्रों में अनियंत्रित विकास को रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।
अनाधिकृत कॉलोनी में मकान लेना पड़ेगा महंगा
अनाधिकृत कॉलोनी में मकान, प्लॉट सहित अन्य प्रॉपर्टी लेना लोगों के लिए महंगा पड़ेगा। क्योंकि इसके आंतरिक विकास कार्यों का 50 प्रतिशत राशि वहां के रहवासियों को देना होगा। बाकी राशि कॉलोनाइजर की बैंक राशि, प्रॉपर्टी जब्त कर उससे भरपाई की जाएगी। इस प्रावधान का उद्देश्य लोगों को अनाधिकृत कॉलोनियों में निवेश करने से पहले जागरूक करना है। साथ ही कॉलोनाइजरों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी।
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अवैध कॉलोनी की परिभाषा बदली
अवैध कॉलोनी उसे कहा जाएगा जो शासकीय भूमि, प्राधिकरण, हाउसिंग बोर्ड, निकायों की जमीन, विकास योजना, खेल-पार्क, पुरातत्व, सांस्कृतिक विरासत, नदी-नालों, राष्ट्रीय और राज्य मार्गों के लिए अधिसूचित जमीन पर बनाई गई हो। इन क्षेत्रों में कॉलोनियां कटने पर वार्ड प्रभारियों से लेकर कलेक्टर तक की जिम्मेदारी तय होगी। शिकायत मिलने पर पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने पर उन पर कार्रवाई होगी। इस व्यवस्था के तहत जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय की जाएगी।
15 दिन में कार्रवाई और 45 दिन में अनुमति
अवैध, अनाधिकृत कॉलोनियों को हटाने और उन पर कार्रवाई करने की समय सीमा 15 दिन तक रहेगी। इसके बाद अधिकारियों पर सरकार जवाब तलब करेगी और उन पर कार्रवाई करेगी। इस मामले में पुलिस को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। वहीं कॉलोनाइजर को तमाम अनुमति देने की समय सीमा 45 दिन के लिए दी गई है। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास विभाग संजय दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश कॉलोनी अधिनियम बन रहा है। इसमें अवैध और अनाधिकृत कॉलोनियां बसने से रोकने के लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान बढ़ाने के साथ-साथ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। वहीं क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि इसके पीछे सरकार की मंशा गांव और शहर के कॉलोनी विकास नियमों को इंटीग्रेट करना है। इसके साथ ही अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाना है, क्योंकि प्रदेश की अवैध कॉलोनियां सरकार के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं।












