डॉ. मोहन यादव कैबिनेट की विशेष बैठक: अनोखा रिकॉर्ड-नरेंद्र मोदी जितनी बार विधायक बने उतनी बार सीएम, जितनी बार सांसद बने उतनी बार पीएम

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर डॉ. मोहन यादव कैबिनेट की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से बात करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, व्यक्तित्व, कार्यशैली, उपलब्धियों पर विस्तार से बात की। डॉ. यादव ने कहा कि सीएम डॉ. यादव ने कहा कि आप अंदाज लगा लो देश नहीं दुनिया में वो एकमात्र व्यक्ति हैं जो जितनी बार विधायक लड़े, उतनी बार सीधे मुख्यमंत्री। कोई ऐसा नहीं है और जितनी बार सांसद लड़े, उतनी बार प्रधानमंत्री। ये भी देश में अपने आप में अनूठा रिकॉर्ड है। और दूसरी बात कि राज्य कहां का है, गृहराज्य कौन सा और चुनाव कहां से जाके लड़े।
मोदी उस वक्त पीएम घोषित जब लंबे समय से गठबंधन सरकारें चल रही थीं
डॉ. यादव ने कहा कि बड़ी बात यह है नरेंद्र मोदी को उस दौर में प्रधानमंत्री का प्रत्याशी निश्चित किया गया, जब गठबंधन के तीस-पैंतीस साल से सरकार थीं। जब स्वर्गीय इंदिरा गांधी की हत्या हुई और उस सहानुभूति में चुनाव हुआ, तब पूर्ण बहुमत की सरकार आखिरी थी। उसके बाद के 89 के चुनाव से लगाकर के 2013 के चुनाव तक लगातार गठबंधन की राजनीति थी और सबको मालूम था कि गठबंधन के बिना तो जैसे कोई दिल्ली की सरकार चल ही नहीं सकती। यूपीए हो, एनडीए हो, स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के समय चौबीस दलों को मिलाकर सरकार बनी थी। ऐसे दौर में कहा जाता था कि बीजेपी अपने बलबूते पर तो सरकार बनाई नहीं सकती। ये असंभव काम है और बीजेपी का बाकायदा कैंडिडेट डिक्लेयर कर देना पीएम का और एकदम उस दौर में जब हम सब जानते हैं कि उसके पहले उस समय की लीडरशिप में कौन-कौन नाम थे, लेकिन ये कितनी बड़ी एक तरह से चुनौती भी थी और उस समय की ये निर्णय की प्रतिबद्धता। वे एक तरह से हमारे बीच में एक चमत्कारी रूप में एक्सेप्ट हुए।
NDA जरूर था लेकिन गठबंधन की जरूरत नहीं थी

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जब वो 2013 के चुनाव के बाद चौदह में प्रधानमंत्री बनकर के सबके सामने आए तो हम सब देखते हैं इस बात को कि पूर्ण बहुमत की सरकार, NDA को NDA जरूर रहा, लेकिन NDA की जरूरत नहीं। और इससे और बड़ी बात एक टेन्योर में पूरा पूर्ण बहुमत, उसके बाद के दूसरे टेन्योर में फिर बहुमत। ये वास्तव में, जैसे मैंने कहा कि ये वाकई आश्चर्य की बात है। और तीसरा टेन्योर और अब तो जो निर्वाचित होने के जो पच्चीस वर्ष हैं आजादी के बाद चुनाव की राजनीति मानने के बाद उनके समान अभी कोई शासन करता? चुनाव के बाद के नहीं। स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू जरूर थे लेकिन वो चुनाव के पहले मनोनित, संविधान लागू होने के बाद जो निर्वाचित जनप्रतिनिधि का समय चाहिए, वो समय उनके पास भी नहीं था।
कृतज्ञता, उत्तम स्वास्थ्य, यशस्वी जीवन की कामना
और ऐसे में हम सब मिलकर उनके दीर्घायु होने की उत्तम स्वास्थ्य की और यशस्वी होने की कामना करते हैं और जैसा कि उन्होंने अपनी मंत्री परिषद में उनके लिए हमने सबने परसुस स्लोगन दिया ‘We will do it’ ये जो भाव है जिसके आधार पर हम सब कर सकते हैं, जो वो कर रहे हैं वो असंभव नहीं है। हो सकता है जिस दिन तय करने की बात सोचते हैं, उस दिन बहुत बड़ा लगता है लेकिन वो सरलता से हो सकता है। उसके प्रमाण इसमें आते हैं। अलग-अलग प्रकार से प्रधानमंत्री मोदी ने देश-राष्ट्र के सामने अपने कार्यों का वर्गीकरण किया गरीब, किसान, वंचित कल्याण के लिए काम किए।
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