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Peoples Update Special :एमपी सीएम हेल्पलाइन:लाखों शिकायतें अभी भी पेंडिंग, 100 दिन से ज्यादा समय से लंबित है मामले

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम लोगों की शिकायतों के जल्द निराकरण का प्रमुख माध्यम मानी जाती है, लेकिन कई विभागों में शिकायतों का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है। पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं होने, राजस्व विभाग में अवैध कब्जों और नगरीय विकास विभाग में साफ-सफाई जैसी समस्याओं को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें लंबित हैं। जनवरी से मई तक लाखों शिकायतें निर्धारित समय सीमा के बाद भी लंबित बनी हुई हैं।
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लाखों शिकायतें अभी भी पेंडिंग, 100 दिन से ज्यादा समय से लंबित है मामले

अशोक गौतम,भोपाल। छतरपुर से लेकर भिंड, मुरैना, सतना, गुना, सीधी और सिंगरौली सहित कई जिलों में पुलिस और राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। सीएम हेल्पलाइन में 50 दिन में निराकरण का प्रावधान होने के बावजूद बड़ी संख्या में मामले 100 दिन से अधिक समय से लंबित हैं। सबसे ज्यादा शिकायतें एफआईआर दर्ज नहीं करने, विवेचना में देरी, अवैध कब्जे और सीमांकन से जुड़ी हैं। शासन स्तर पर अब विभागों की समीक्षा कर लंबित मामलों के निराकरण की तैयारी की जा रही है। हाल ही में मुख्य सचिव ने भी कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में इस पर गंभीर चिंता जताई है।

पुलिस और राजस्व विभाग की शिकायतें बनीं सबसे बड़ी चिंता

छतरपुर के अरविंद विश्वकर्मा सप्ताह में दो बार कोतवाली थाना बुलाए जाते हैं। इन्होंने मारपीट की एफआईआर दर्ज नहीं होने पर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत की है। अरविंद कहते हैं कि उन पर दबाव बनाकर पुलिस वाले शिकायत बंद कराते हैं। मना करने पर जेल भेजने की धमकी मिलती है। पुलिस का ऐसा रवैया अकेले छतरपुर में नहीं बल्कि भिंड, मुरैना, सतना, गुना, सीधी और सिंगरौली सहित कई अन्य जिलों में है। बावजूद पुलिस से संबंधित सीएम हेल्पलाइन में शिकायतें अन्य विभागों से अधिक हैं। इसी तरह राजस्व से जुड़े मामले भी कम नहीं हो रहे हैं।

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50 दिन की समय सीमा, लेकिन 100 दिन से ज्यादा लंबित मामले

सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का ज्यादातर 50 दिन में निराकरण का प्रावधान है। जनवरी से मई तक एक लाख 77 हजार से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं। हाल ही में मुख्य सचिव ने कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में पाया कि 100 दिन से अधिक लंबित प्रकरण राजस्व, गृह, नगरीय विकास एवं आवास विभाग में सबसे ज्यादा हैं। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतों के समयबद्ध निराकरण को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है।

राजस्व, गृह विभाग में बढ़ा लंबित मामलों का दबाव

राजस्व विभाग में एक लाख 20 हजार से अधिक शिकायतें लंबित हैं, जिनमें 30 हजार से ज्यादा शिकायतें 100 दिन बाद भी लंबित हैं। सीमांकन, कब्जा, नामांतरण और खसरा अपडेट से जुड़े मामलों का दबाव सबसे अधिक है। गृह विभाग में 54 हजार 943 शिकायतें लंबित हैं, जिनमें 15 हजार 773 प्रकरण 100 दिनों से अधिक पुराने हैं। वहीं नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 32 हजार 490 शिकायतें लंबित हैं, जिनमें 3 हजार 366 शिकायतें 100 दिन से अधिक समय से लंबित हैं। साफ-सफाई, सीवेज, पेयजल, प्रधानमंत्री आवास और अवैध कॉलोनियों से जुड़ी शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं हो पा रहा है।

आंकड़ों में समझिए शिकायतों की स्थिति

इस वर्ष अभी तक सीएम हेल्पलाइन में कुल 81,01,650 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें 1,28,500 शिकायतें अभी तक अटेंड नहीं की गई हैं, जबकि एल-3 और एल-4 स्तर की 1,92,220 शिकायतें समय सीमा से बाहर लंबित हैं। 100 दिन से अधिक लंबित शिकायतों में राजस्व विभाग में 30,403, गृह विभाग में 15,773 और नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 3,366 शिकायतें शामिल हैं। विषयवार देखें तो एफआईआर दर्ज नहीं करने की 5,016, विवेचना में विलंब की 4,714, अवैध कब्जे की 3,923, भूमि सीमांकन की 1,454, प्रधानमंत्री आवास की 942 और अवैध कॉलोनियों की 886 शिकायतें सबसे ज्यादा लंबित हैं।

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जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कहा? 

सेवानिवृत्त आईएएस मनोहर दुबे का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन शासन की जवाबदेही का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में बड़ी संख्या में शिकायतों का 100 दिन से अधिक समय तक लंबित रहना विभागीय उदासीनता और निगरानी तंत्र पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। प्रमुख सचिव राजस्व ई-रमेश कुमार ने कहा कि अधिकांश शिकायतों का समय सीमा में निराकरण किया जाता है, जबकि कुछ मामले नीतिगत होने के कारण समय लेते हैं और उनकी लगातार समीक्षा की जा रही है। वहीं अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे ने कहा कि लंबित शिकायतों को लेकर अधिकारियों से जानकारी मांगी गई है और एल-4 स्तर की शिकायतों की डायरेक्ट्रेट स्तर पर समीक्षा कर जल्द निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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