जुबान संभालकर!MP का ऐसा गांव, जहां गाली देने पर जुर्माना, जुबान फिसली तो लगाओ झाड़ू

बुरहानपुर का बोरसर गांव इन दिनों अपनी अनोखी पहल से चर्चा में है। इस गांव ने गाली-गलौज के खिलाफ सख्त नियम बना दिया है। अब अगर कोई अपशब्द बोलता पकड़ा गया, तो उसे 500 रुपये जुर्माना देना होगा।
Follow on Google News
MP का ऐसा गांव, जहां गाली देने पर जुर्माना, जुबान फिसली तो लगाओ झाड़ू
social media
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    बुरहानपुर। मध्यप्रदेश का बोरसर गांव इन दिनों अपनी अनोखी सोच और सख्त नियमों की वजह से पूरे प्रदेश में चर्चा में है। यह गांव अब गाली-मुक्त गांव के नाम से पहचाना जा रहा है। यहां अगर किसी ने मां-बहन की गाली दी, तो उसे 500 रुपये जुर्माना भरना होगा। अगर जुर्माना नहीं दिया, तो गांव की सफाई करनी पड़ेगी।

    गांव में प्रवेश करते ही जगह-जगह लगे पोस्टर और बैनर लोगों का ध्यान खींचते हैं। इन पर साफ लिखा है कि गाली देना मना है। अगर कोई व्यक्ति अपशब्द बोलते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, उसे एक घंटे तक गांव की सफाई भी करनी पड़ सकती है। पंचायत का कहना है कि यह नियम हर किसी पर बराबर लागू होगा। चाहे आम ग्रामीण हो या प्रभावशाली व्यक्ति, नियम तोड़ने पर कार्रवाई तय है।

    क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

    गांव के लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज अक्सर बड़े झगड़ों की वजह बन जाती थी। इससे परिवारों और पड़ोसियों के रिश्तों में तनाव पैदा होता था। खासकर बच्चों पर इसका बुरा असर पड़ रहा था। वे भी बड़ों की भाषा सीखकर गालियां देने लगे थे।

    यह भी पढ़ें: MP में प्रॉपर्टी फ्रीहोल्ड महंगा! नए नियमों से बढ़ेगी फीस, 10 साल बाद बदलेगा नियम; सरकार की नई तैयारी

    /img/99/1775721789473

    इसी समस्या को देखते हुए गांव के मूल निवासी और मुंबई के अभिनेता व समाजसेवी अश्विन पाटिल ने पंचायत के सामने यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि अगर गांव की भाषा सुधर जाएगी, तो माहौल भी बेहतर हो जाएगा। पंचायत ने इस सुझाव को गंभीरता से लिया और सर्वसम्मति से इसे लागू कर दिया।

    पंचायत ने बनाई खास निगरानी टीम

    गांव में इस नियम को सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे लागू कराने के लिए पंचायत ने 20 पंचों और युवाओं की एक विशेष टीम बनाई है। यह टीम पूरे गांव में नजर रखती है। अगर कोई नियम तोड़ता है, तो तुरंत उसे रोका जाता है और पंचायत को जानकारी दी जाती है।

    यह भी पढ़ें: MP TET विवाद पर सरकार का नरम रुख: सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार पर मंथन, सॉलिसिटर जनरल से राय लेने दिल्ली जाएंगे अधिकारी

    गांव के युवाओं ने इस अभियान को पूरी जिम्मेदारी से अपनाया है। लोग मजाक में इसे 'गाली पकड़ो स्पेशल फोर्स' भी कहने लगे हैं। लेकिन इस टीम की वजह से गांव में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

    बच्चों की जुबान पर अब संस्कार

    इस पहल का सबसे अच्छा असर बच्चों पर पड़ा है। गांव वालों का कहना है कि पहले बच्चे खेलते-खेलते गालियां दे देते थे, लेकिन अब उनकी भाषा में बदलाव आ गया है। गांव वालों का कहना है कि इस नियम से आपसी झगड़े कम हुए हैं। लोग अब बात करते समय ज्यादा संयम बरत रहे हैं। इससे सामाजिक रिश्तों में भी सुधार आया है।

    फ्री वाई-फाई और सेवाभाव कक्ष

    बोरसर गांव सिर्फ गाली-मुक्त अभियान तक सीमित नहीं है। यहां बच्चों के लिए लाइब्रेरी की शुरुआत की गई है, ताकि वे पढ़ाई की तरफ ज्यादा ध्यान दें। युवाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ने के लिए गांव में चार फ्री वाई-फाई कनेक्शन भी लगाए गए हैं। इसके अलावा गांव में सेवाभाव कक्ष भी शुरू किया गया है। यहां जरूरतमंद लोगों को मुफ्त जरूरी सामान दिया जाता है। समाजसेवी और दानदाता भी इसमें मदद कर रहे हैं। इससे गांव में सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत हो रही है।

    /img/99/1775722305930

    बोरसर गांव की यह पहल अब दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। पंचायत का कहना है कि अगर भाषा सुधरेगी, तो समाज भी बेहतर बनेगा।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts