भोपाल। मध्यप्रदेश में टीईटी की अनिवार्यता को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य सरकार ने अब नरमी का रुख दिखाया है। शिक्षकों के लगातार विरोध और आंदोलन को देखते हुए सरकार इस मामले में कानूनी विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रही है। बुधवार 8 अप्रैल को वल्लभ भवन में स्कूल शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय की गई। बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि मामले में सॉलिसिटर जनरल से राय ली जाएगी।

स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में जल्द से जल्द कानूनी सलाह लें। जानकारी के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग के संचालक स्तर के एक अधिकारी और संयुक्त संचालक (विधि) गुरुवार 9 अप्रैल को दिल्ली जाकर सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात कर सकते हैं। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
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प्रदेश में टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक संगठनों का आंदोलन लगातार जारी है।

शिक्षकों का कहना है कि पुराने नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू करना गलत है और इससे उनकी नौकरी पर खतरा बन रहा है। शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करे और इस आदेश को रद्द कराया जाए।
इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे मध्यप्रदेश सरकार पर भी निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है।
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दरअसल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संचालक लोक शिक्षण (DPI) ने पिछले महीने संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को टीईटी अनिवार्यता से संबंधित निर्देश जारी किए थे।