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‘खेती खेड़ो हरिनाम की, छोड़ी न चला जाए घर-बार’, संत सिंगाजी के जीवन पर आधारित नृत्य नाटिका ने बांधा समां

हरसूद में रानी दुर्गावती जयंती समारोह के दूसरे दिन संत सिंगाजी महाराज के जीवन पर आधारित ‘खेती खेड़ो हरिनाम की’ नृत्य नाटिका का मंचन हुआ।

हरसूद। रानी दुर्गावती जयंती समारोह के दूसरे दिन धरती आबा बिरसा मुंडा खेल मैदान में ‘खेती खेड़ो हरिनाम की, छोड़ी न चला जाए घर-बार’ नृत्य नाटिका का मंचन किया गया। नाट्य प्रस्तुति में निमाड़ के संत सिंगाजी महाराज के जन्म से लेकर समाधि तक के जीवन प्रसंगों को प्रभावी ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया गया। करीब 1 घंटे 40 मिनट की इस प्रस्तुति में कलाकारों ने संवाद, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के जरिए संत सिंगाजी महाराज के जीवन, भक्ति और उनके संदेशों को जीवंत किया।

जन्म से समाधि तक के प्रसंगों की प्रस्तुति

नृत्य नाटिका में संत सिंगाजी महाराज के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से उनके जीवन के आध्यात्मिक पक्ष, भक्ति भावना और लोककल्याण से जुड़े संदेशों को दर्शकों तक पहुंचाया। प्रस्तुति के दौरान संत सिंगाजी महाराज की लोकगाथा और उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

नाटक में संवाद और अभिनय के साथ भाव-भंगिमाओं का भी प्रभावी इस्तेमाल किया गया। इससे मंच पर संत सिंगाजी महाराज के जीवन की घटनाओं को जीवंत रूप मिला और दर्शकों को उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों से रूबरू होने का अवसर मिला।

कर्तव्य, विनम्रता और मानवीय मूल्यों का संदेश

नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से संत सिंगाजी महाराज की लोकगाथा से जुड़े संदेश को भी सामने रखा गया। प्रस्तुति का मूल भाव यह रहा कि सच्ची महानता स्वयं को बड़ा साबित करने में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा, सम्मान और विनम्रता के साथ निभाने में है। संत सिंगाजी महाराज की यही सीख आज भी लोकस्मृति में जीवित है। इस अवसर पर जनजाति कार्य मंत्री विजय शाह ने संत सिंगाजी महाराज का उल्लेख करते हुए कहा कि निमाड़ की धार्मिक, आध्यात्मिक और लोक-सांस्कृतिक परंपरा में उनका विशेष स्थान है। उनकी जीवनगाथा में भक्ति, अध्यात्म और लोककल्याण की भावना दिखाई देती है। उनके जीवन से जुड़े कई लोकप्रसंग कर्तव्यनिष्ठा, विनम्रता और मानवीय मूल्यों की सीख देते हैं।

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राजा फत्तेशाह के भामगढ़ आगमन की लोकगाथा भी जुड़ी

कार्यक्रम के दौरान संत सिंगाजी महाराज से जुड़े प्रसंग के साथ राजा फत्तेशाह के भामगढ़ आगमन की लोकगाथा का भी उल्लेख किया गया। यह प्रसंग भी निमाड़ की लोकस्मृति में सुनाया जाता है। रानी दुर्गावती जयंती समारोह के दूसरे दिन आयोजित इस नाट्य प्रस्तुति को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में एसडीएम आरसी खतेडिया, तहसीलदार संगीता मेहतो, पूर्व महापौर भावना शाह, जिला योजना समिति सदस्य संतोष सिटोके, जिला महामंत्री संतोष सोनी, विधायक प्रतिनिधि कमल खंडेलवाल, सोहनलाल उईके, गौरीशंकर टाले सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Satyendra Thakur
By Satyendra Thakur

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