रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को धान खरीदी केंद्रों में कथित चोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी विधायक नाराज हो गए और सदन के भीतर नारेबाजी करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि धान खरीदी केंद्रों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं और किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए विपक्ष ने सदन में स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन अध्यक्ष ने इसे मंजूर नहीं किया।
इसके बाद विपक्षी विधायक अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे और विरोध करते हुए सदन के बेल तक पहुंच गए। लगातार शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। विधानसा अध्यक्ष ने लगभग 30 विपक्षी विधायकों को निलंबित कर दिया।
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नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि-किसानों के धान के नुकसान को छिपाने के लिए ‘चूहों द्वारा धान खा जाने’ जैसे बहाने बनाए जा रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने कहा कि-यह किसानों के साथ अन्याय है और इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि-सरकार की नीति में बदलाव के कारण धान की मिलिंग और उठाव की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। बघेल के मुताबिक, इस वजह से राज्य को करीब 4 हजार 6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और 22 लाख क्विंटल से अधिक धान की कमी सामने आई है।
विधानसभा में वाहनों की फिटनेस और ओवरलोडिंग के मुद्दे पर भी बहस और हंगामा हुआ। विधायक ओंकार साहू ने बीते तीन सालों में व्यावसायिक वाहनों को जारी किए गए फिटनेस प्रमाणपत्रों की जिलेवार जानकारी मांगी।
इस पर मंत्री केदार कश्यप ने जवाब देते हुए बताया कि-ओवरलोडिंग, बिना परमिट और बिना बीमा के संचालन के कुल 77 हजार 810 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों से लगभग 42 करोड़ रुपये की वसूली की गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिना परीक्षण के किसी भी वाहन को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है। हालांकि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने हंगामा किया।