ईरान के मिनाब में एक स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। ईरान ने इस हमले के लिए दो अमेरिकी नौसेना अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। इस घटना में करीब 175 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल थे। ईरान का कहना है कि यह हमला जानबूझकर किया गया जबकि अमेरिकी पक्ष इसे खुफिया जानकारी की गलती बता रहा है। इस घटना के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान के मुताबिक भारत, दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया में स्थित उसके दूतावासों ने इन अमेरिकी अधिकारियों की तस्वीरें जारी की हैं। ईरान का दावा है कि ये दोनों अधिकारी अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस स्प्रुएन्स (USS Spruance) से जुड़े हुए हैं और हमले में उनकी भूमिका रही है। इस कदम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है।
ईरान ने जिन अधिकारियों को जिम्मेदार बताया है उनमें लीघ आर. टेट (कमांडिंग अधिकारी) और जेफ्री ई. यॉर्क (कार्यकारी अधिकारी) शामिल हैं। आरोप है कि इन दोनों ने तीन बार टॉमहॉक मिसाइल दागने का आदेश दिया जिससे मिनाब के स्कूल को निशाना बनाया गया और बड़ी संख्या में बच्चों की जान चली गई। ईरानी दूतावासों ने सोशल मीडिया पर कड़ी भाषा में बयान जारी करते हुए इन अधिकारियों को दोषी ठहराया है।
जिनेवा में हुई आपात बहस के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने इस हमले को ‘सोची-समझी और जानबूझकर की गई कार्रवाई’ बताया। उनका कहना है कि संघर्ष के पहले ही दिन यह हमला किया गया जिसमें 175 से अधिक छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की जान गई। ईरान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा रहा है और कार्रवाई की मांग कर रहा है।
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अमेरिकी पक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका निशाना आम नागरिक नहीं थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य जांच में शुरुआती तौर पर इसे खुफिया जानकारी की गलती बताया गया है। बताया गया है कि जिस टारगेट को निशाना बनाना था, उसके लिए पुराने नक्शों और डेटा का इस्तेमाल किया गया जिससे पास के स्कूल पर मिसाइल गिर गई। रिपोर्ट के मुताबिक, असली निशाना एक ईरानी सैन्य ठिकाना था, जो पहले उसी परिसर का हिस्सा था।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस हमले के पीछे ईरान की भी भूमिका हो सकती है और उसकी हथियार प्रणाली अक्सर सटीक नहीं होती। इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने हमले का वीडियो साझा करते हुए अमेरिका पर जंग का आरोप लगाया है। दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
यह हमला 28 फरवरी को उस समय हुआ जब अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले किए जा रहे थे। बताया गया कि दक्षिणी ईरान के होर्मोजगान क्षेत्र में स्थित एक गर्ल्स स्कूल को निशाना बनाया गया। इस हमले में कई छात्राओं की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दर्जनों लड़कियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। कुछ दिनों बाद मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 175 तक पहुंच गया।
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इस हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में कई ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा गया है। लगातार बढ़ते इस टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।