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ईरान जंग पर सुलह की कोशिश तेज:इस्लामाबाद में 3 देशों की बैठक, पाकिस्तान निभा रहा अहम रोल

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक शुरू हो गई है जिसकी मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है।
इस्लामाबाद में 3 देशों की बैठक, पाकिस्तान निभा रहा अहम रोल
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की अहम बैठक शुरू हो गई है जिसकी मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है। इस बैठक को क्षेत्र में जारी तनाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है जहां कई अहम मुद्दों पर बातचीत की जा रही है।

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    AI Generated image

    विदेश मंत्रियों की अहम मुलाकातें

    बैठक के दौरान बद्र अब्देलत्ती ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात की। इसके अलावा इशाक डार, हाकान फिदान और फैसल बिन फरहान के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे। सभी नेता शहबाज शरीफ से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात और संभावित समाधान पर चर्चा करेंगे। इन बैठकों को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर उन देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं जिनका इस पूरे क्षेत्र में बड़ा प्रभाव है।

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    पाकिस्तान की मध्यस्थता की पहल

    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान खुद को एक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। उसने ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने की पेशकश की है। पाकिस्तान ने ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव भी सौंपा है, जिसमें न्यूक्लियर प्रोग्राम को बंद करने, मिसाइल कार्यक्रम सीमित करने, क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन रोकने और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। फिलहाल ईरान इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है और इसे लेकर उसकी प्रतिक्रिया अहम मानी जा रही है।

    अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी

    जहां एक तरफ बातचीत की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी मौजूदगी बढ़ाते हुए यूएसएस त्रिपोली को करीब 3,500 सैनिकों के साथ तैनात किया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि अमेरिका कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सैन्य दबाव भी बनाए रखना चाहता है, ताकि स्थिति पर नियंत्रण रखा जा सके।

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    इस्लामाबाद क्यों बना बैठक का केंद्र

    इस बैठक के लिए इस्लामाबाद को इसलिए चुना गया क्योंकि पाकिस्तान के ईरान और सऊदी अरब दोनों के साथ संतुलित और अच्छे संबंध हैं। यही वजह है कि उसे एक न्यूट्रल जगह के तौर पर देखा जा रहा है। पहले यह बैठक तुर्किये में प्रस्तावित थी लेकिन बाद में इसे पाकिस्तान शिफ्ट कर दिया गया ताकि सभी पक्षों के बीच सहज बातचीत हो सके।

    Sumit  Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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