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धार भोजशाला : मस्जिद पक्ष को मिलेगी 98 दिन के सर्वे की वीडियोग्राफी, ASI को गूगल ड्राइव पर अपलोड करने के निर्देश

धार भोजशाला मामले में हाई कोर्ट ने एएसआई को 98 दिन के सर्वे की वीडियोग्राफी मस्जिद पक्ष को देने के निर्देश दिए। सलमान खुर्शीद ने याचिका की वैधता, वक्फ एक्ट और स्वामित्व विवाद पर सवाल उठाए। अगली सुनवाई में अधूरी दलीलें पूरी होंगी।
मस्जिद पक्ष को मिलेगी 98 दिन के सर्वे की वीडियोग्राफी, ASI को गूगल ड्राइव पर अपलोड करने के निर्देश

इंदौर - धार भोजशाला मामले में मंगलवार को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ा घटनाक्रम सामने आया। हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश दिया कि 98 दिन चले भोजशाला सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी 27 अप्रैल से पहले गूगल ड्राइव पर अपलोड कर मस्जिद पक्ष यानी मौलाना कलामुद्दीन वेलफेयर सोसायटी और कोर्ट को पासवर्ड उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट के इस आदेश के बाद बहुचर्चित भोजशाला विवाद में कानूनी हलचल और तेज हो गई है।

मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर आपत्ति दर्ज कराने की अनुमति दी है, लेकिन वीडियोग्राफी उपलब्ध नहीं होने से आपत्ति दर्ज कराना संभव नहीं हो पा रहा। इस पर हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एएसआई को वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं एएसआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई।

सुनवाई के दौरान सलमान खुर्शीद ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला स्वामित्व विवाद से जुड़ा सिविल मामला है, जिसे रिट याचिका के जरिए नहीं सुना जा सकता। उन्होंने कहा कि जिला कोर्ट में पहले से वाद लंबित है, ऐसे में सीधे हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का कोई औचित्य नहीं है। खुर्शीद ने यह भी तर्क दिया कि 2003 के एएसआई आदेश के 19 साल बाद दाखिल याचिका समयसीमा से बाहर है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

 

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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