अब हम भी इस जंग में हैं!अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध में कूदा यमन, इजरायल पर दागी मिसाइलें!

यमन। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव में अब यमन ने भी इस जंग में कदम रखा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी है, जिससे दक्षिणी इजरायल के बीरशेबा और आसपास के कस्बों में सायरन बज उठे। यह पहली बार है जब मौजूदा संघर्ष में यमन से सीधे हमला हुआ है।
इजरायल सेना की आई प्रतिक्रिया
इजरायली सेना ने पुष्टि की कि यमन की ओर से मिसाइल दागी गई थी और उन्होंने इसे पहचान कर रोकने की कोशिश की। सेना ने कहा कि वह लगातार खतरे का आकलन कर रही है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। मिसाइल हमले के बाद बीरशेबा और पास के मुख्य परमाणु अनुसंधान केंद्र के आसपास के इलाकों में सायरन कई बार बज उठे।
पूरी रात जारी रहे भीषण हमले
शनिवार तड़के यमन की तरफ से मिसाइलें दागी गईं। शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक इजरायल के कई हिस्सों में सायरन बजते रहे। वहीं, ईरान और हिज्बुल्लाह की ओर से भी इजरायल पर लगातार हमले जारी रहे।
हूती विद्रोहियों का बयान
यमन के हूती विद्रोही, जो ईरान के करीबी माने जाते हैं, उन्होंने शुक्रवार को कहा कि यदि कोई देश ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका और इजरायल का समर्थन करता है, या लाल सागर के मार्ग का इस्तेमाल हमला करने के लिए किया जाता है, तो वे सैन्य हस्तक्षेप करने के लिए तैयार हैं।
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हूतियों की यमन में क्या स्थिति?
हूती विद्रोही 2014 से यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण बनाए हुए हैं। 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन ने उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था। हालांकि, हाल के वर्षों में सऊदी अरब और हूतियों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम बना हुआ था।
लाल सागर में पहले के हमले
हूती विद्रोहियों ने इससे पहले भी गाजा युद्ध के दौरान लाल सागर में शिपिंग मार्गों को निशाना बनाया था। यानि ये साफ है कि हूती समुद्री मार्गों और रणनीतिक ठिकानों पर हमला करने में सक्षम हैं।
यमन का ईरान के साथ कनेक्शन
हूती विद्रोही ईरान के करीबी माने जाते हैं। उनके हमले अक्सर ईरान के हितों के अनुसार आते हैं। वर्तमान में यह हमला स्पष्ट रूप से ईरान समर्थित कार्रवाई का हिस्सा है।
इजरायल और अमेरिका की सुरक्षा सतर्क
इजरायल और अमेरिका अब पूरी तरह से सतर्क हो गए हैं। इजरायली सेना ने मिसाइल हमले के बाद नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी। वहीं, अमेरिका भी अपने खुफिया नेटवर्क और सैन्य साधनों के माध्यम से खतरे का आकलन कर रहा है।
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युद्ध का बढ़ता दायरा
अब यह साफ हो गया है कि इजरायल और ईरान के बीच की जंग केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रही। यमन जैसी नई ताकत के जुड़ने से यह संघर्ष और जटिल हो गया है। भविष्य में और भी देशों के इस संघर्ष में शामिल होने की संभावना है।
यमन के कूदने से तनाव और बढ़ेगा
- संघर्ष का भौगोलिक विस्तार- अब जंग सिर्फ इजरायल-ईरान तक सीमित नहीं रही। यमन की मिसाइलें दक्षिणी इजरायल तक पहुंच गई हैं। अब संघर्ष और क्षेत्रों तक फैल रहा है तो जोखिम और जटिलताएं भी बढ़ेंगी।
- नई रणनीतिक ताकतें- हूती विद्रोही लाल सागर और समुद्री मार्गों पर हमला करने में सक्षम हैं। इसका मतलब, समुद्री कनेक्टिविटी और वैश्विक व्यापार मार्ग भी अस्थिर हो सकते हैं।
- ईरान से जुड़ाव- हूतियों का ईरान के करीबी होना इस हमले को सिर्फ यमन का नहीं, बल्कि ईरान समर्थित कार्रवाई का हिस्सा बनाता है।
- मानव सुरक्षा का संकट- मिसाइल हमले के बाद नागरिकों को सुरक्षित स्थानों में भेजना पड़ा। ऐसे हमले तनाव और भय की स्थिति पैदा करते हैं, जो लंबे समय तक रह सकती है।
- संभावित अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया- यमन के जुड़ने के बाद, अन्य देश भी कूटनीतिक या सैन्य कार्रवाई में शामिल हो सकते हैं। इससे संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है।











