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वन्यजीव मांस तस्करी केस: ढाई साल से जेल में आरोपी, अब तक ट्रायल शुरू नहीं; परिवार ने जांच पर उठाए सवाल

महू के वन्यजीव मांस तस्करी केस में आरोपी ढाई साल से जेल में हैं। परिवार ने जांच और ट्रायल में देरी को लेकर सवाल उठाए हैं। एसटीएफ की कार्रवाई भी चर्चा में है।
वन्यजीव मांस तस्करी केस: ढाई साल से जेल में आरोपी, अब तक ट्रायल शुरू नहीं; परिवार ने जांच पर उठाए सवाल
ढाई साल से जेल, ट्रायल नहीं!

भोपाल। वन्यजीवों के मांस की कथित तस्करी से जुड़े एक मामले में आरोपियों के लंबे समय से जेल में बंद रहने और अब तक ट्रायल शुरू नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामला इंदौर वन मंडल के महू वन क्षेत्र से जुड़ा है। आरोपियों के परिजनों का दावा है कि ढाई साल से अधिक समय बीतने के बावजूद जांच एजेंसियां मामले में पर्याप्त सबूत सामने नहीं ला सकी हैं।

परिजनों का आरोप है कि मामले की जांच के दौरान कुछ लोगों को केवल आपसी संबंध और संपर्क के आधार पर भी जांच के दायरे में लाया जा रहा है। इसी क्रम में अब एसटीएफ की कार्रवाई आरोपियों के परिवार और परिचितों तक पहुंचने की बात सामने आ रही है।

इम्तियाज के परिचितों तक पहुंची जांच

जानकारी के मुताबिक, मामले में जेल में बंद इम्तियाज के एक परिचित सबा को भी एसटीएफ की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। परिजनों और मामले से जुड़े लोगों का दावा है कि जांच एजेंसी के पास उनके खिलाफ वर्ष 2022 की एक तस्वीर के अलावा 2024 के कथित अपराध से जोड़ने वाली कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि सबा को वर्ष 2025 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वहीं, इम्तियाज के कुछ अन्य परिचितों के घर पर भी एसटीएफ इंदौर द्वारा मुंबई में दबिश देने की जानकारी सामने आई है।

ढाई साल बाद भी ट्रायल शुरू नहीं होने का दावा

मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि लंबे समय के बाद भी केस ट्रायल के चरण तक नहीं पहुंच पाया है। आरोपियों के परिवारों का कहना है कि गवाह, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। परिजनों का यह भी दावा है कि आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं मिल पा रहा है और उनकी जमानत अर्जियां लगातार खारिज हो रही हैं। हालांकि, जमानत से जुड़े निर्णय न्यायालय के समक्ष उपलब्ध रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होते हैं।

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जेल में मुलाकात को लेकर भी सवाल

परिजनों की ओर से यह आरोप भी लगाया गया है कि जेल में बंद इम्तियाज और अन्य आरोपियों से परिवार के लोगों को मुलाकात में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि जेल में बंद कैदियों से परिवार और वकील की मुलाकात से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन होना चाहिए। इस संबंध में जेल प्रशासन या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना जरूरी होगा।

क्या है पूरा मामला?

मामला इंदौर वन मंडल के महू वन परिक्षेत्र में वन्यजीवों के कथित शिकार और मांस की तस्करी से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इम्तियाज (40), सलमान (43) और जौहर हुसैन (71) को वन अपराध के मामले में आरोपी बनाया गया है।

इसके अलावा भोपाल निवासी आमिर मम्मा और लटेरी निवासी बिलाल की तलाश किए जाने की बात कही गई है। परिजनों की ओर से दावा किया गया है कि आरोपियों को किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क से जोड़ने के लिए बैंक ट्रांजेक्शन या अन्य ठोस साक्ष्य सामने नहीं रखे गए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

एक ही मामले में दो FIR का भी आरोप

मामले को लेकर परिजनों की ओर से एक ही घटना से संबंधित दो FIR दर्ज किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। उनका कहना है कि इससे केस और अधिक जटिल हो गया है। वहीं, जांच एजेंसियों की ओर से आरोपियों के खिलाफ क्या-क्या साक्ष्य जुटाए गए हैं और दो FIR को लेकर उनकी क्या स्थिति है, इस पर आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

जांच और अदालत की प्रक्रिया पर नजर

मामले में लगाए जा रहे आरोपों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को अलग-अलग देखना जरूरी है। आरोपियों की दोषसिद्धि या निर्दोषता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा। ऐसे में केस में मौजूद दस्तावेज, गवाह, फॉरेंसिक या अन्य साक्ष्य और अदालत के आदेश ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगे।

Amit Sen
By Amit Sen

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