भोपाल के छात्रों ने इस बार CBSE 10वीं के नतीजों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मेहनत का लोहा मनवाया है। जहां मानसरोवर पब्लिक स्कूल के छात्र विशेष श्रीवास्तव ने 92.6% अंक हासिल कर अपने लक्ष्य को पूरा किया, वहीं सागर पब्लिक स्कूल की छात्रा नंदिका गुप्ता ने 99.6% अंक हासिल कर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। दोनों छात्रों की सफलता में मेहनत, अनुशासन और परिवार का मजबूत साथ साफ नजर आता है।
विशेष श्रीवास्तव ने इस बार 10वीं बोर्ड परीक्षा में 92.6% अंक हासिल किए। उन्होंने पहले से ही तय कर लिया था कि उन्हें 90% से ज्यादा अंक लाने हैं और इसी लक्ष्य के साथ उन्होंने पूरे साल पढ़ाई की। विशेष बताते हैं कि परीक्षा के दौरान उन्होंने पूरी तरह पढ़ाई पर फोकस रखा और खुद को डिस्ट्रैक्शन से दूर रखा। रिजल्ट आने के बाद वह बेहद खुश हैं और कहते हैं कि “जो सोचा था, वो हासिल कर लिया।”
विशेष अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देते हैं। उनके पिता अशिष श्रीवास्तव Tata Group से जुड़े हैं और मां हाउसवाइफ हैं। उनका कहना है कि उन्हें घर से हर तरह का सपोर्ट मिला। पढ़ाई के लिए जो भी जरूरत पड़ी, वह पूरी की गई। साथ ही स्कूल के शिक्षकों ने भी समय-समय पर मार्गदर्शन किया, जिससे उनका आत्मविश्वास बना रहा।
विशेष अब आगे PCM स्ट्रीम चुनने की तैयारी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य JEE की तैयारी करना है और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना करियर बनाना है। उनका मानना है कि अगर अभी से सही दिशा में मेहनत की जाए, तो आगे की राह आसान हो जाती है।
दूसरी ओर नंदिका गुप्ता ने 99.6% अंक हासिल कर शानदार प्रदर्शन किया है। सागर पब्लिक स्कूल की छात्रा नंदिका के इन अंकों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
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नंदिका का सपना आगे चलकर सिविल सर्विस में जाना है। वह आईएएस ऑफिसर बनना चाहती हैं और समाज के लिए काम करने का लक्ष्य रखती हैं। पढ़ाई के दौरान उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ तैयारी की और अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर मेहनत की।
नंदिका के पिता एसवी पॉलिटेक्निक कॉलेज में लेक्चरर हैं, जबकि उनकी मां सागर पब्लिक स्कूल में टीचर हैं। नंदिका बताती हैं कि जब भी वह पढ़ाई के दौरान निराश होती थीं, तब उनके माता-पिता और शिक्षक उन्हें मोटिवेट करते थे। यह सपोर्ट ही उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहा।
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नंदिका की तैयारी का तरीका काफी सधा हुआ था। वह रोजाना 2-3 घंटे की कंसिस्टेंट पढ़ाई करती थीं और सेल्फ स्टडी पर ज्यादा ध्यान देती थीं। उनका मानना है कि ज्यादा मटेरियल पढ़ने से बेहतर है कि सीमित और सही स्टडी मटेरियल पर फोकस किया जाए। इसी रणनीति ने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया।
नंदिका ने सोशल मीडिया का उपयोग भी सोच-समझकर किया। उन्होंने इसे सिर्फ पढ़ाई से जुड़े कंटेंट तक सीमित रखा और बाकी चीजों से दूरी बनाई। इससे उनका समय बचा और वह अपनी पढ़ाई पर बेहतर ध्यान दे पाईं।
नंदिका ने अन्य छात्रों को सलाह दी है कि वे पढ़ाई के दौरान इधर-उधर भटकने के बजाय एक तय रणनीति पर काम करें। उनका कहना है कि एक ही मटेरियल को बार-बार पढ़ना ज्यादा फायदेमंद होता है, बजाय इसके कि हर जगह से थोड़ा-थोड़ा पढ़ा जाए।