लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा के बाद स्पीकर ओम बिरला गुरुवार को पहली बार सदन की अध्यक्षता करते हुए नजर आए। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को कभी बोलने से नहीं रोका गया और संसद में नियम सर्वोपरि हैं।
ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब विपक्ष मजबूत हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। संसद के सभी सदस्य नियमों के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखते हैं।
स्पीकर ने बताया कि पिछले दो दिनों में सदन में 12 घंटे से अधिक समय तक बहस हुई, ताकि सभी सांसद अपनी बात रख सकें। उन्होंने कहा कि यह सदन 140 करोड़ भारतीयों का प्रतिनिधित्व करता है और हर सांसद अपने क्षेत्र की समस्याएं और उम्मीदें लेकर यहां आता है।
उन्होंने कहा कि उनकी हमेशा कोशिश रहती है कि हर सदस्य को नियमों के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिले, खासकर उन सांसदों को भी जो कम बोलते हैं।
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ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा विचारों का एक जीवंत मंच है, जहां हर आवाज सुनी जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में सभी सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुना गया और वे हर सदस्य के आभारी हैं, चाहे वे आलोचक ही क्यों न रहे हों। उन्होंने यह भी कहा कि यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि लोकतंत्र की महान भावना का प्रतिनिधित्व करता है।
विपक्ष की शिकायतों पर जवाब देते हुए स्पीकर ने कहा कि कुछ सदस्यों का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सदन में हर सदस्य को नियमों के तहत बोलने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि नियम 372 के तहत प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले अध्यक्ष से अनुमति लेनी होती है।
माइक बंद करने के आरोपों पर ओम बिरला ने कहा कि चेयर के पास माइक बंद करने का कोई बटन नहीं होता। विपक्ष के कई वरिष्ठ सदस्य पहले इस कुर्सी पर बैठ चुके हैं, इसलिए उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी है।
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महिला सांसदों को मौका नहीं देने के आरोपों पर स्पीकर ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके कार्यकाल में सभी महिला सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि बजट चर्चा के दौरान कुछ महिला सदस्य ट्रेजरी बेंच की ओर जाकर नारेबाजी करने लगी थीं, जो अप्रत्याशित घटना थी। इसलिए उन्होंने उस समय सदन में सत्ता पक्ष के नेता को अंदर न आने का आग्रह किया।
सदस्यों के निलंबन के मुद्दे पर ओम बिरला ने कहा कि उनके सभी दलों के सांसदों से व्यक्तिगत संबंध हैं, लेकिन सदन की व्यवस्था बनाए रखना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह भी विचार करने की जरूरत है कि ऐसी स्थिति क्यों बनती है कि सदन को निलंबन जैसे कठोर फैसले लेने पड़ते हैं।
स्पीकर ने अंत में कहा कि वे हमेशा सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील करते हैं, लेकिन जब सदस्य नियमों का पालन नहीं करते, तो सदन को स्थगित करना पड़ता है।