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World Kidney Day:दूषित पानी का खामियाजा: किडनी पर पड़ रहा खतरनाक असर, भागीरथपुरा कांड के बाद बढ़ी चिंता

दूषित पानी का खामियाजा: किडनी पर पड़ रहा खतरनाक असर, भागीरथपुरा कांड के बाद बढ़ी चिंता
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

     इंदौर। शहर में दूषित पानी की समस्या अब केवल पेट के संक्रमण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह किडनी जैसी गंभीर बीमारी का कारण भी बनती जा रही है। हाल ही में सामने आए भागीरथपुरा दूषित जल कांड के बाद इस खतरे को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता और बढ़ गई है।

    इस घटना में जिन 36 लोगों की मौत हुई, उनमें कई मरीजों में किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी सामने आई थीं। वहीं जिन लोगों का इलाज अस्पतालों में किया गया, उनमें भी किडनी संक्रमण के मामले पाए गए। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक दूषित पानी पीने से शरीर में बैक्टीरिया और विषैले तत्व पहुंचते हैं, जो धीरे-धीरे किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं।

    अस्पतालों में बढ़ रहे ऐसे मरीज

    विशेषज्ञों के मुताबिक अस्पतालों में आने वाले किडनी रोगियों में करीब 10 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जिनकी बीमारी का प्रमुख कारण दूषित पानी है। शुरुआत में होने वाले संक्रमण का इलाज संभव है, लेकिन समय पर उपचार न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। डॉक्टर यह भी बताते हैं कि कई लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाइयां लेकर सेवन करते हैं, जिससे किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह भी किडनी रोग बढ़ने का एक बड़ा कारण बन रहा है।

    बैक्टीरिया से बढ़ता संक्रमण

    विशेषज्ञों के अनुसार दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया जैसे कोलेरा और ई-कोलाई शरीर में प्रवेश कर आंतों में संक्रमण पैदा करते हैं। कई मामलों में यह संक्रमण खून के माध्यम से किडनी तक पहुंच जाता है और वहां सूजन या संक्रमण की स्थिति बन जाती है।

    यदि मरीज समय पर इलाज नहीं कराता, तो यह संक्रमण धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करने लगता है। गंभीर स्थिति में मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत तक पड़ सकती है।

    देर से सामने आते हैं लक्षण

    किडनी रोग की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामने नहीं आते। लगभग 90 प्रतिशत मरीजों को शुरुआती चरण में यह पता ही नहीं चलता कि उनकी किडनी प्रभावित हो रही है। जब तक थकान, शरीर में सूजन, भूख कम लगना या पेशाब में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

    ट्रांसप्लांट के इंतजार में हजारों मरीज

    इंदौर में किडनी से जुड़े गंभीर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शहर में अब तक 88 किडनी डोनेशन हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद तीन हजार से अधिक मरीज ट्रांसप्लांट के इंतजार में हैं। अंगदान को लेकर जागरूकता की कमी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    साफ पानी पीना जरूरी

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी को सुरक्षित रखने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का सेवन बेहद जरूरी है। यदि किसी क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता संदिग्ध हो, तो उसे उबालकर या फिल्टर करके ही पीना चाहिए। साथ ही खुले स्रोतों या असुरक्षित जगहों के पानी से बचना चाहिए।

    किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. जय का कहना है कि दूषित पानी का लगातार सेवन किडनी की समस्याओं को बढ़ा सकता है। उनके मुताबिक उनके पास आने वाले करीब 10 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिनकी बीमारी का कारण दूषित पानी होता है।

    वहीं किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्पित का कहना है कि 40 वर्ष की आयु के बाद सभी लोगों को कम से कम एक बार किडनी की जांच अवश्य करवा लेनी चाहिए। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और अनुवांशिक कारण भी किडनी रोग के प्रमुख कारण हैं, इसलिए खानपान और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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