मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध गौसेवक चंद्रशेखर दास की मौत के बाद इलाके में हालात अचानक बिगड़ गए। शनिवार को एक ट्रक हादसे में उनकी मौत के बाद गुस्साए समर्थकों ने दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे जाम कर दिया। भीड़ को हटाने पहुंची पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया।
घटना के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 20 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं 300 से ज्यादा अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि, स्थिति अब नियंत्रण में है और आगे भी उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस के अनुसार, 57 वर्षीय चंद्रशेखर दास शनिवार सुबह कोसीकलां इलाके के पास एक सड़क हादसे का शिकार हो गए। बताया जा रहा है कि, वे गौतस्करी के शक में एक ट्रक की जांच कर रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक अन्य ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक सड़क दुर्घटना थी और कम दृश्यता के कारण ट्रक चालक उन्हें देख नहीं पाया। हालांकि बाबा के समर्थक इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका आरोप है कि यह गोतस्करों की साजिश थी और बाबा की जानबूझकर हत्या की गई है।

चंद्रशेखर दास की मौत की खबर फैलते ही आसपास के इलाकों से हजारों लोग दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे पर जमा हो गए। समर्थकों ने बाबा का शव सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस दौरान कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। दिल्ली-आगरा हाईवे देश के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, ऐसे में जाम के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब उसी समय देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तीन दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे पर गोवर्धन क्षेत्र में मौजूद थीं। प्रशासन के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई।
जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर सड़क खाली कराने की कोशिश की तो स्थिति अचानक बिगड़ गई। भीड़ ने पुलिस पर ईंट-पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। पथराव में 23 पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायल अधिकारियों में कई थाना प्रभारी और पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। भीड़ ने कई सरकारी वाहनों में भी तोड़फोड़ की। पुलिस के मुताबिक, उपद्रवियों ने एसपी देहात, एडीएम प्रशासन और एसडीएम की सरकारी गाड़ियों के अलावा कई पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसके साथ ही 50 से ज्यादा आंसू गैस के गोले छोड़े गए और रबर बुलेट व स्मोक ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया।
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पुलिस ने बवाल वाली जगह से कई संदिग्ध सामान भी बरामद किए हैं। घटनास्थल से 15 बाइक और 315 तथा 312 बोर के तमंचों के खाली कारतूस मिले हैं। इसके अलावा डंडे, ईंट-पत्थर और अन्य हथियार भी बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल हिंसा के दौरान किया गया था। पुलिस का कहना है कि, इन सबूतों के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
इस मामले में पुलिस ने कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। छाता कोतवाली में दर्ज पहली एफआईआर में 23 नामजद समेत करीब 300 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इन पर नए आपराधिक कानून बीएनएस की कई धाराओं के साथ-साथ सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम और आईटी एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया है।
नामजद आरोपियों में गौरव उर्फ भूरा, नरेश, हिमांशु, पवन, कपिल शर्मा, धर्मेंद्र, विष्णु, अनुज, शनि, केशव, अरुण, अमन, सुभाष, सीताराम, भोला पंडित, योगेश, मुकेश गोस्वामी, महेश चौधरी, वीरेंद्र और हरिओम लाहौर समेत अन्य लोग शामिल हैं।

दूसरी एफआईआर बरसाना थाने में दर्ज की गई है। यह केस हिंदू रक्षा दल से जुड़े दक्ष चौधरी और उनके साथियों के खिलाफ दर्ज किया गया है। पुलिस का आरोप है कि, इन लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाकर माहौल को भड़काया। इस मामले में दक्ष चौधरी, अक्कू पंडित, सचिन, रितेशपाल और डॉक्टर प्रकाश सिंह को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस ने इस मामले में अब तक 20 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार लोगों में दक्ष चौधरी और उसके कई साथी शामिल हैं। सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस श्लोक कुमार के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों का मेडिकल कराने के बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
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इस मामले में सिर्फ पुलिस की ओर से ही नहीं, बल्कि बाबा के समर्थकों की तरफ से भी मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल ने अज्ञात गोतस्करों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि चंद्रशेखर दास की हत्या की गई है। इसके अलावा बाबा के शिष्य हरिओम की शिकायत पर राजस्थान नंबर के ट्रक चालक खुर्शीद खान के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है।
घटना के बाद प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई। समर्थकों ने बाबा के लिए स्मारक बनाने और गौशाला की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की। जिला अधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने भरोसा दिलाया कि आजनौंख गांव की गौशाला में चंद्रशेखर दास की याद में स्मारक बनाया जाएगा। इसके अलावा वहां स्थायी पुलिस चौकी भी स्थापित की जाएगी ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या न हो।
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प्रशासन ने बताया कि समर्थकों की मांग को देखते हुए शनिवार को ही चंद्रशेखर दास का अंतिम संस्कार कर दिया गया। यह अंतिम संस्कार बिना पोस्टमार्टम के किया गया और उस दौरान प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।
चंद्रशेखर दास को इलाके में ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से जाना जाता था। वे कई सालों से गौसेवा से जुड़े हुए थे और मथुरा के छाता क्षेत्र के आजनौंख गांव में रहते थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बाबा गायों की रक्षा के लिए हमेशा आगे रहते थे। जब भी कहीं गोवंश से जुड़ी कोई समस्या होती, लोग उन्हें सूचना देते थे। धीरे-धीरे वे इलाके में गौसेवा के लिए प्रसिद्ध हो गए।
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चंद्रशेखर दास के बड़े भाई केशव सिंह के अनुसार, चंद्रशेखर ने बहुत कम उम्र में ही सन्यास का रास्ता चुन लिया था। वे मूल रूप से फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज क्षेत्र के रहने वाले थे और करीब 10 साल की उम्र में ही बाबा बन गए थे। उन्होंने कभी शादी नहीं की और अपना पूरा जीवन गायों की सेवा में समर्पित कर दिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि फरसा वाले बाबा का गौतस्करों में इतना खौफ था कि, उनके इलाके में आते ही तस्कर अवैध रूप से ले जाए जा रहे गोवंश को छोड़कर भाग जाते थे। यही वजह थी कि उनके समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
फरसा वाले बाबा सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय थे। उनकी टीम के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाखों फॉलोअर्स थे।
इन सभी प्लेटफॉर्म पर ‘टीम फरसा वाले बाबा’ नाम से अकाउंट चलाए जाते थे।
घटना के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। फॉरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, हालात अब पूरी तरह नियंत्रण में हैं, लेकिन किसी भी तरह की अफवाह या हिंसा को रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।