UP News:गौ-रक्षा को लेकर फिर मुखर हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- गाय को राजमाता का दर्जा दे दे तो...

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मंचों से गौ-भक्ति की बातें जरूर की जाती हैं, लेकिन जमीन पर गायों की हालत बेहद खराब है। उन्होंने आरोप लगाया कि गौशालाओं और आश्रय स्थलों में गायों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनके मुताबिक गौ-तस्करी पर अब तक प्रभावी रोक नहीं लग सकी है और केवल कागजी कार्रवाई करके जिम्मेदारियां पूरी की जा रही हैं।
गौ-रक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरा
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सरकारें गौ-रक्षा के नाम पर बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन वास्तविक हालात अलग दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को गायों की सुरक्षा की चिंता है, उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जाती है। उनके अनुसार केवल भाषणों और प्रचार से गायों की रक्षा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में गौ-सेवा की भावना होती, तो आज सड़कों और आश्रय स्थलों में गायों की ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिलती।
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'गायों के लिए केवल कागजी काम हो रहा'
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यदि भाजपा आज गाय को राजमाता का दर्जा दे दे, तो वे अपनी यात्रा तुरंत बंद कर देंगे। उन्होंने साफ कहा कि अब वोट उसी सरकार को दिया जाएगा, जो गाय को माता मानकर उसके संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि जनता के सामने अब विकल्प रखा जा रहा है और लोगों को तय करना होगा कि वे किस तरह की सरकार चाहते हैं। उनके बयान को आगामी चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
'योगी आदित्यनाथ से गौ-रक्षा को लेकर काफी उम्मीदें'
एक दिन पहले बांदा में दिए गए बयान का जिक्र करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गौ-रक्षा को लेकर लोगों को काफी उम्मीदें थीं। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ से जुड़े होने के कारण उनसे ज्यादा अपेक्षाएं थीं, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित काम नहीं हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि शासन केवल डर और सख्ती से नहीं चलाया जा सकता।
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'नेता जनसंख्या के लिए काम नहीं ढूंढ पा रहे'
जनसंख्या को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि देश की आबादी को बोझ मानना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि नेताओं में क्षमता हो, तो वे हर व्यक्ति के लिए काम और अवसर पैदा कर सकते हैं। उनके मुताबिक ज्यादा जनसंख्या का मतलब ज्यादा कार्यशक्ति भी होता है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या को समस्या बताने के बजाय उसके बेहतर उपयोग पर ध्यान दिया जाना चाहिए।












